कुरुक्षेत्र, 20 दिसम्बर। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान एवं सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सी.सी.आर.टी.) नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यशाला के दसवें दिन शिक्षा में नवाचार विषय पर शिक्षकों को नवीन जानकारी से अपडेट किया गया। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने यू.आई.ई.टी. के निदेशक डॉ. सी.सी. त्रिपाठी का परिचय कराया। डॉ. त्रिपाठी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी में शिक्षा में नवाचार की आवश्यकता है। नवाचार के माध्यम से ही अच्छी शिक्षा एवं एक अच्छे नागरिक का निर्माण कर सकते हैं। बच्चों को ऊर्जावान एवं शिक्षा के प्रति ललक पैदा करने के लिए नवाचार की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार में बच्चे का सर्वांगीण विकास करना है। यदि छात्र जागरूक नहीं होगा तो हमारी शिक्षा अधूरी रह जाएगी। उन्होने कहा कि सीखने-सिखाने के नवाचारी तरीकों पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। विषय चाहे एक-दूसरे से कितने ही अलग क्यों न हों, पर इन सबको जोड़ने वाला सूत्र एक ही है – कुछ अलग करना, कुछ नया करना, जिसके चलते बच्चे सीखने की प्रक्रिया में इस कदर रम जाते हैं कि वे उम्मीद से ज्यादा करने की ठान लेते हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में शिक्षा में बदलाव के लिए पढ़ना, टीमवर्क, लिखना, सुनना तथा नेतृत्व करने के गुर अत्यन्त आवश्यक हैं। शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों को ऊर्जावान एवं स्वप्रेरित बनाने के लिए संस्थान की प्रभावकता, समस्या समाधान, बहुआयामी गुण, सृजनात्मक सोच, मौखिक संवाद होना चाहिए। उन्होंने सन् 1970 तथा सन् 2010 का तुलनात्मक अध्ययन कर बताया कि सन् 1970 में पढ़ना, गणना करना, लिखना, याद करना था जबकि 2010 से देखें तो टीम वर्क, समस्या समाधान, बहुव्यक्तित्व, कौशल, नेतृत्व क्षमता का महत्व है।
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