कुरुक्षेत्र 26 दिसम्बर। विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पावन ब्रहमसरोवर के पवित्र जल में नागा साधुओं और अन्य संत जनों ने आस्था की डुबकी लगाई। नागा साधुओं ने सबसे पहले अपने देवता और चांदी की चरण पादुका को परम्परा अनुसार सरोवर में स्नान कराया और इसके बाद हर-हर महादेव के जाप के साथ शाही स्नान किया। नागा साधुओं के शाही स्नान को देखने के लिए श्रृद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस शाही स्नान के लिए प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था के तमाम पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इतना ही नहीं नागा साधुओं के लिए ब्रहमसरोवर के युद्घिष्ठर घाट जगह तय की गई थी। कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण का स्पर्श 8 बजकर 15 मिनट और मोक्ष का समय 10 बजकर 55 मिनट पर था, इस दौरान स्पर्श और मोक्ष के समय स्नान करने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से नागा साधुओं और अन्य संत समाज के लोगों के लिए विशेष प्रबंध युद्घिष्ठर घाट पर किए गए थे। सूर्य ग्रहण के मौक्ष के समय नागा साधुओं का पहुंचना तय हुआ था, इसलिए संत समाज के लोगों को पिहोवा रोड़ से लाने के लिए पायलट और सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करवाई थी। पिहोवा रोड आश्रम से नागा साधुओं का एक जत्था पैदल मार्च करते हुए थर्ड गेट, एलएनजेपी अस्पताल से होते हुए ब्रहमसरोर के युद्घिष्ठर घाट पर पहुंचा। श्री पंच दशनाम साधु संस्था से भानगिरी महाराज ने कहा कि नागा साधु श्री गुरु दत्राते जी की फौज है और पूरे विश्व में नागा साधु रहते है। इस सूर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र में हरियाणा, पजांब व आसपास के राज्यों से लगभग 300 नागा साधु व संत के समाज के लोग पहुंचे है। इस सूर्य ग्रहण को लेकर उपायुक्त डा. एसएस फुलिया व पुलिस अधीक्षक आस्था मोदी द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्नान करने, साफ सफाई के साथ अन्य प्रकार के सभी उच्चस्तरीय प्रबंध किए है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र के इस पावन सरोवर में प्रत्येक अमावस्या के दिन समस्त तीर्थ एकत्रित हो जाते है और सूर्य ग्रहण के अवसर पर इस तीर्थ के जल में स्नान हजारों अश्वमेघ यज्ञों के फल के बराबर माना जाता है।
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भगवान श्रीकृष्ण भी सूर्यग्रहण के अवसर पर पहुंचे थे कुरुक्षेत्र में
महाभारत की एक कथा के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण के मथुरा छोडऩे के बाद अपने माता-पिता (यशोदा और नंद बाबा) व देवी राधा से आखिरी मुलाकात हुई थी। यही नहीं सभी गोपियों संग भगवान श्रीकृष्ण ने पवित्र ब्रह्मसरोवर में स्नान किया था। गोपियों से मिलने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की कुंती व द्रौपदी सहित पांचों पांडवों से भेंट हुई। सूर्यग्रहण का पुराणों में जिक्र है कि राहु द्वारा भगवान सूर्य के ग्रस्त होने पर सभी प्रकार का जल गंगा के समान, सभी ब्राह्मण ब्रह्मा के समान हो जाते हैं। इसके साथ ही इस दौरान दान की गई सभी वस्तुएं भी स्वर्ण के समान होती हैं। वहीं सूर्य ग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र में स्नान के लिए सिख गुरु, धर्म गुरु व श्रद्घालु भी यहां बराबर आते रहे। सिखों के प्रथम गुरु गुरनानक देव जी महाराज सन 1499 से 1509 के बीच किसी सूर्य ग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र आएं।
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