करनाल 15 जनवरी। बेमौसमी बारिस के चलते रोग के अनुकूल हो चुके मौसम से आलू की फसल में लेट ब्लाईट बीमारी आ जाने की सम्भावना बढ़ गई है। इससे बचाव के लिए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से समबद्ध कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग तथा वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय की ओर से एडवाईज़री जारी कर इसकी सूचना कृषि निदेशालय हरियाणा को प्रेषित की गई है, ताकि किसानो को इस बीमारी से फसल को बचाने के लिए जागरूक किया जा सके। यह जानकारी शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र के उप निदेशक डॉ. सतेन्द्र यावद ने दी। डॉ. सतेन्द्र यादव ने बताया कि आलू की फसल में इस बीमारी का मुख्य कारण फाईटोफ्थोरा फफूंद है। अनियमित पीली हरी घाव ज्यादातर टिप और पत्तियों के मार्जन के पास होती है, जो तेजी से बड़े काले भूरे रंग के नेक्रोटिक धब्बों में परिवर्तित हो जाती है। सफेद फफूंदी जिसमें स्पोरंजिया होता है और रोग जनको के बिजाणु विशेषकर नेक्रोटिक घावों के किनारो के आस-पास संक्रमित पत्तियों की निचली सतह पर देखे जा सकते हैं, जो हल्के से गहरे भूरे रंग के घावों के तने को घेरे रहते हैं। प्रभावित तने और पैटिओल्स ऐसे स्थानो पर कमजोर हो जाते हैं और गिर सकते हैं। सम्पूर्ण फसल विशेष रूप से रोग अनुकूल परिस्थितियों में काले धुंधले में दिखाई देती है और नष्ट हो सकती है। इससे बचाव के लिए किसानो को विभिन्न रजिस्ट्रड व अनुमोदित कीटनाटक दवाओं का स्प्रे कर लेना चाहिए। इनमें एजोक्सीस्ट्रोबिन 23 प्रतिशत एससी दवा के 500 एमएल को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति 2.5 एकड में स्प्रे करें। इसी प्रकार कैपटान 50 प्रतिशत ड्ïब्लयू पी दवा का अढ़ाई किलोग्राम का घोल बनाकर उसे एक हजार लीटर पानी में मिलाकर अढ़ाई एकड़ फसल में छिड़काव करें। क्लोरोथालोनिल 75 प्रतिशत ड्ïब्लयू पी दवा के एक किलोग्राम को 800 लीटर में घोल कर प्रति अढ़ाई एकड़ में छिड़काव करें। किसान इनमे से किसी एक दवा का छिड़काव कर सकते हैं।
Home / Health / आलू की फसल में लेट ब्लाईट बीमारी की सम्भावना को देखते केन्द्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने जारी की एडवाज़री
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