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हरियाणवी पंडाल में लोकनृत्यों पर झूम उठे दर्शक

कुरुक्षेत्र, 16 दिसंबर (एस)  अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में हरियाणवी पंडाल में तीसरे दिन हरियाणवी नृत्य संध्या में लोक संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। इस अवसर पर फागण, धमाल, लूर, खोडिय़ा, रसिया, घुम्मर, सपेरा, बागड़ो, गुग्गा सभी लोक नृत्यों के माध्यम से दर्शक झूमने के लिए मजबूर हो गए। हरियाणवी पंडाल में हरियाणवी लोकनृत्य संध्या आयोजन का उद्ेश्य हरियाणवी संस्कृति में रचे बसे हरियाणा के अलग-अलग लोक नृत्यों को दर्शकों से रूबरू करवाना था। उन्होंने बताया कि हरियाणवी संस्कृति तथा लोकनृत्यों में विविधता के जो स्वरूप देखने को मिलते हैं वे सभी हरियाणा पंडाल के मंच पर प्रस्तुत किए गए। हरियाणवी लोकनृत्यों के माध्यम से विवाह के अवसर पर बरात जाने के पश्चात महिलाओं द्वारा किया जाने वाला खोडिय़ा नृत्य विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर बंचारी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया रसिया ने भी दर्शकों का खूब मन मोहा।

कृषि मंत्री धनखड़ ने दिए कलाकारों को 11-11 हजार रुपये

कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने हरियाणवी नृत्य संध्या में बतौर मुख्यातिथि पहुंचकर जहां एक ओर हरियाणवी सांस्कृतिक दर्शन पंडाल की सराहना की वहीं पर दूसरी ओर कलाकारों की कला से प्रभावित होकर उनको ईनाम में 11-11 हजार रुपये की राशि की घोषणा की। इस मौके पर हरियाणा पंडाल की ओर से मंत्रियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया।

लंबू डांस बना आकर्षण का केन्द्र

हरियाणवी पंडाल जहां एक ओर हरियाणवी संस्कृति का केन्द्र तथा पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है वहीं पर हरियाणा के सात-सात फुट के दो गाबरूओं दिनेश भल्ला और जितेन्द्र मोर दोनों ही दर्शकों एवं पर्यटकों के लिए नृत्य कर उनका खूब मनोरंजन करते हैं। दोनों ही सात-सात फुट के हरियाणवी गाबरूओं के साथ पर्यटक एवं दर्शक खूब सेल्फियां लेते हैं। दोनों ही कलाकार जब मंच पर नाचते हैं तो लोग उन्हें लंबू डांस के नाम से कहकर पुकारते हैं। इस प्रकार वे भीड़ में आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं।

हरियाणवी शब्दों के अर्थ बताने पर हरियाणवी पंडाल में खूब बंट लड्डू

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में हरियाणवी पंडाल में हरियाणवी शब्दों के अर्थ पूछकर पर्यटकों में किया जा रहा है हरियाणवी संस्कृति का प्रचार-प्रसार। हर रोज पंडाल में 10 हरियाणवी शब्द पूछे जाते हैं और जवाब देने वाले पर्यटकों को 2 लड्डू ईनाम में दिए जाते हैं। अब तक 30 से अधिक पर्यटकों से सवाल पूछे जा चुके हैं।

गुरु शराणानन्द जी महाराज एवं स्वामी ज्ञानानन्द भी हुए हरियाणवी संस्कृति के कायल

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में हरियाणवी पंडाल को देखकर गुर शरणानन्द जी महाराज रमन रेती वृन्दावन मथुरा एवं गीता विद्वान ज्ञानानन्द महाराज ने कहा कि गीता महोत्सव में हरियाणा पंडाल के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति सबके आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।

हरियाणा के देसी रंगों की रागनियां हरियाणवी पंडाल में बन रही हैं आकर्षण का केन्द्र

हरियाणवी पंडाल में 9 साल के छात्र भरत वत्स, डॉ. प्रवीण कादियान तथा रागनी गायक पाले राम ने हरियाणवी रागनियों के माध्यम से उपस्थित भीड़ का मन मोह लिया। हरियाणवी पंडाल में तीसरे दिन मंच पर हरियाणवी रागनियों के अलग-अलग रंग देखने को मिले। हरियाणवी रागनियों को सुनकर दर्शक झूम उठे। बुजुर्ग मंत्रमुग्ध हो उठे।

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