करनाल 13 दिसम्बर। मानव संस्थान विकास मंत्रालय की पहल पर पांच दिवसीय कार्यशाला का बुद्धा कालेज में समापन हो गया। कार्यशाला के समापन पर कार्यशाला संयोजक बलवंत सिंह खोखर ने कहा कि रटने की प्रवृत्ति से ज्ञान, जानकारी तो आ जाती है परन्तु उस ज्ञान से कोई चमत्कार, सृजनशीलता पैदा नहीं होती। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नवीन विचारों को शामिल किया जा रहा है जिससे बच्चों के ज्ञान को व्यवहारिक रूप यानी जीवन में फायदा मिल सके। उन्होंने कहा शिक्षा किताबी न बन जाए इसलिए अध्यापकों को प्रशिक्षित करके शिक्षा को जीवनोपयोगी बनाने के गम्भीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि मूल्यों रहित शिक्षा मनुष्य के सामने आनी वाली भावी चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि शिक्षा की धूरी अध्यापक और बच्चे हैं जिनमें परस्पर तालमेल ,विश्वास का समावेश होना जरुरी है। उन्होंने कहा कि अध्यापक और बच्चों के बीच अविश्वास और दूरी से शिक्षण प्रक्रिया बाधित होती है इसलिए अध्यापक विद्यार्थी के क्रियाकलाप पर पैनी नजर रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के साथ किया गया नाकारात्मक व्यवहार बच्चे को उद्दंड बना सकता है। उन्होंने कहा विद्यार्थी और अध्यापक सीखने-सीखाने की प्रकिया की सांझी कड़ी है। उन्होंने कहा कि सीखना एकतरफा प्रकिया नहीं है। अध्यापक को विद्यार्थियों के बीच काम करते हुए अनुभव होता है कि सब विद्यार्थी एक तरीके से सीख नहीं सकते। विद्यार्थियों की रूचियां, आदतें, गुण भिन्न-भिन्न होने से उनको सिखाने के लिए भी भिन्न-भिन्न वैज्ञानिक तरीके अपनाने होते हैं। उन्होंने कहा अध्यापक अध्यापक अच्छा मनोवैज्ञानिक और मार्गदर्शक होना चाहिए। स्कूल का समूचा वातावरण ऐसा बनाएं जिसमें बच्चे की रूचियों को जगह मिले उनके आकर्षण के सभी तत्वों का समावेश हो ताकि बच्चे स्कूल में स्वेच्छा से शामिल हो। उन्होंने कहा विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के पहलू नजरअंदाज न हो, लगातार उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मनोरंजन के लिए स्कूल के पास पर्याप्त संसाधनों का होना अहम स्थान रखता है। वहीं डाॅ. ईश्वर सिंह ने कार्यशाला में चर्चा किए गए बिन्दुओं को महत्वपूर्ण बताते हुए कि प्रशिक्षण उपरान्त अध्यापक की कार्यशैली में बदलाव देखने को मिलेगा और शिक्षा में गुणात्मक सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के लगातार नवाचारी प्रयासों से विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं । उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी प्रतिभा को पहचानने वाली नजर में है।

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