करनाल 4 जनवरी। करनाल जिला के शामगढ़ स्थित हरियाणा के एकमात्र आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र में तैयार आलू की उन्नत व नवीनतम किस्मों की महक गुजरात तक जा पहुंची है। इन्हें अपने प्रदेश में ले जाने के लिए गुजरात के साबरकांठा जिला के आलू उत्पादक प्रगतिशील किसानों के एक शिष्टमंडल ने केन्द्र का दौरा कर आलू की नई-नई किस्मों को देखने में गहरी रूची दिखाई। केन्द्र के प्रभारी एवं उपनिदेशक डॉ. सत्येन्द्र यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले इस केन्द्र में आलू एक्सपो (मेला) का आयोजन किया गया था, जिसमें विभिन्न प्रांतों के आलू उत्पादक किसानों का भ्रमण हुआ था। इनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान व कर्नाटक के किसान शामिल थे। यादव ने बताया कि गुजराती किसानों को चिपसोना-1, चिपसोना-3 व फराईसोना(चिप्स बनाने वाले) वैरायटी के बीज दिखाए गए। इसी प्रकार कुफरी मोहन जो सब्जी के तौर पर खाने में इस्तेमाल होता है, की वैरायटी भी दिखाई। इस बीच वहां के किसानों को, बिना मिट्टी के यानी हवा में आलू पैदा करने की बिल्कुल नई व यूनीक एरोफोनिक तकनीक भी दिखाई। हरियाणा में और केवल शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र में, सैंट्रल पोटैटो रिसर्च इन्सटीट्यूट शिमला के सहयोग से इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो कि भारत सरकार का एक संस्थान है। उन्होने बताया कि गुजरात के किसानों को भ्रमण के दौरान केन्द्र में आलू के ब्रीड, फांउडेशन और सर्टीफाईड बीज का उत्पादन कैसे किया जाता है। डॉ० सत्येन्द्र यादव के अनुसार आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र शामगढ़ में जिस तरह से हालिया दो-तीन सालों में आलू की नई-नई किस्में ईजाद की गई है, उसे देखकर लगता है कि कृषि विविधिकरण और आलू उत्पादन के क्षेत्र में केन्द्र की गतिविधियां मील का पत्थर बनेगी।
Home / Education / आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र की उन्नत किस्में अब गुजरात के लोगों का आहार बनेेंगी, 50 आलू उत्पादक प्रगतिशील किसानों ने किया शामगढ़ स्थित केन्द्र का दौरा
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