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बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए अब ब्लाक स्तर पर खोले जाएंगे संस्कृति विद्यालय, परीक्षाओं को लेकर गांवों में स्कूल के खाली पद पर कुछ समय के लिए शिक्षक नियुक्त करने का अधिकार दिया पंचायत को

कुरुक्षेत्र 14 जनवरी। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि बच्चों के उज्जवल भविष्य को जहन में रखते हुए सरकार ने ब्लाक स्तर पर संस्कृति विद्यालय खोलने का निर्णय लिया है, हालांकि अभी तक संस्कृति विद्यालय जिलास्तर पर चल रहे थे। इन विद्यालयों के खुलने से बच्चों को फायदा मिलेगा और स्कूलों में अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कार ग्रहण कर पाएंगे। शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर गुरुकुल में शिक्षा विभाग व राष्ट्रीय स्कूल खेल फेडरेशन द्वारा आयोजित 65वीं राष्ट्रीय विद्यालय क्रीड़ा फुटबाल प्रतियोगिता के उदघाटन सत्र के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में हरियाणा प्रदेश में शिक्षा में गुणानात्मक सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने पर फोकस रखकर नीतियां तैयार कर रही है। इस प्रदेश के विद्यार्थी अच्छी शिक्षा ग्रहण करके हरियाणा के विकास में अपना अहम योगदान दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राईमरी स्कूलों में 25 बच्चों से कम संख्या रह गई है, उनमें से कुछ स्कूलों को बंद कर दिया गया है और कुछ स्कूलों को संख्या पूरी करने का मौका दिया गया है, अगर संख्या पूरी नहीं हुई तो जिन प्राईमरी स्कूलों में 25 से कम बच्चे होंगे, उन स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा। उन्होने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में साईंस विषय में बच्चों की संख्या काफी कम रह गई है, इसलिए साईंस विषयों को बढ़ावा देने और बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए 11-12 स्कूलों के एक कलस्टर पर साईंस विषयों का एक स्कूल जरुर होगा। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या पूरी होगी और तमाम सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। एक प्रश्न का जवाब देते हुए शिक्षामंत्री ने कहा कि प्रदेश में जिलास्तर पर संस्कृति विद्यालय चल रहे है, अब सरकार ने इन विद्यालयों को ब्लाक स्तर पर खोलने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध करवाई जा सके। इन विद्यालयों से बच्चों को बहुत फायदा मिलेगा। वहीं उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का समय निकट है, इसलिए सरकार ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिन स्कूलों में शिक्षक का कोई पद खाली है, उस जगह पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पंचायतों को परीक्षाओं तक गांव के ही पढ़े लिखे युवा को शिक्षक के तौर पर रखने का अधिकार दिया है और इस प्रकार के शिक्षक को सक्षम की तरह वेतन दिया जाएगा।

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