करनाल 06 सितम्बर, आम जनता को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने के लिए शुक्रवार को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज करनाल के नेत्ररोग ओपीडी ब्लाक में संस्थान की जन स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम की अगली श्रृंखला में एक जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ सुरेन्द्र कश्यप जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बताया कि भारत में अभी भी लाखों लोग ऐसे हैं जो आज भी अपने जीवन में रोशनी के लिए किसी और नागरिक द्वारा नेत्रदान की राह देख रहे हैं। डॉ कश्यप ने बताया कि नेत्रदान एक महादान है जो की किसी व्यक्ति को मरने के बाद भी किसी और की आँखों में जिन्दा रखता है। उन्होंने कहा कि कल्पना चावला मेडिकल हस्पताल की हमेशा से ये कोशिश रही है कि इस तरह की गतिविधियों के लिए आम जनता को जागरूक किया जाये और समाज में ऐसे विषयों पर चर्चा चले जिनसे जनमानस का कल्याण हो।
जन स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम के नोडल अधिकारी और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ राजेश गर्ग ने इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए जानकारी दी कि सम्पूर्ण भारत में हर वर्ष नेत्रदान मुहिम अभियान पखवाडा 25 अगस्त से 08 सितम्बर के बीच बनाया जाता है ताकि आम जनता के साथ साथ सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को इस बारे में जागृत कर इस मुहिम से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि शरीर के किसी भी अंग की कीमत नहीं लगाई जा सकती क्योंकि ये अनमोल हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी इंसान की मृत्यु होती है तो वो अपने पैसे, जमीन -जायदाद, सोना चाँदी, गाड़ी, घर आदि सब कुछ संभाल कर अपने परिवार या समाज को दे जाना चाहता है तो फिर वो इंसान कैसे अपने शरीर के अनमोल अंगों को अग्नि में जला कर या मिट्टी में दफन कर सकता है जिससे लोगों की जिन्दगी में रौशनी हो सकती है।
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की और से डॉ प्रीती ने बताया कि कैसे आँख के कॉर्निया, झिल्ली से हजारों लोगों को ज्योतिदान मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में फिलहाल करीब 11 लाख लोगों को आँखों के कॉर्निया की जरुरत है पर सिर्फ 30 हजार के करीब कॉर्निया ही नेत्रदान से प्रतिवर्ष मिल पाते है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के लिए व्यक्ति को प्रतिज्ञा पत्र भरना होता है जिसमे उसकी पूरी जानकारी लिखी जाती है। व्यक्ति की मृत्यु पर उसके परिवारजन जल्द से जल्द नजदीकी नेत्र बैंक से संपर्क करते हैं तो नेत्र बैंक की टीम उनके घर आकर मृतक की आँखों का कॉर्निया ले जाती है। पर ये कार्य छह घंटों के भीतर ही भीतर हो जाना चाहिए।
नेत्ररोग विभाग की तरफ से संकाय सदस्य डॉ रौली सूद ने कहा की नेत्रदान के लिए टीम को सिर्फ 10 मिनट का समय लगता है। मृतक के चेहरे से आँख निकलने के बाद चेहरा नहीं बिगड़ता क्योंकि उसमे तभी नकली आँख लगा दी जाती है। उन्होंने बताया कि किसी भी उम्र, लिंग, जाती, धर्म का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि आँख के पुराने हुए आपरेशन के बावजूद भी नेत्रदान किया जा सकता है। रेबीजए एड्स आदि कुछ और बिमारिओं को छोडक़र अमूमन अन्य सभी बिमारियों में भी नेत्रदान संभव है। शुगर और उच्च रक्तचाप के मरीज भी नेत्रदान कर सकते हैंण् उन्होंने बताया कि नेत्रदान पूरी तरह से मुफ्त है और आँखों को ना बेचा जा सकता है और ना ही खरीदा जा सकता है।
इस पूरे कार्यकर्म का आयोजन नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुमित खंडूजा की अगुआई में हुआ। उन्होंने अपने सन्देश में कहा कि उनका विभाग नेत्रदान को प्रोत्साहित करने के लिए दृढसंकल्प है और भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियाँ उनका विभाग करता रहेगा।
डॉ राजेश गर्ग ने कार्यक्रम के समापन में कहा कि दानवीर कर्ण की इस नगरी को महाराजा कर्ण ही की तरह दानवीर बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि आने वाले वर्षों में पूरे भारत में करनाल जिले से सर्वाधिक नेत्रदान के प्रतिज्ञा पत्र भरे जायें और असल में उतना नेत्रदान भी हो।
कार्यक्रम में प्रोफेसर डा. विजय खनगवाल, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ अशोक कुमार, डॉ अमनदीप सिंह, डॉ प्रेरणा अग्रवाल, डॉ संतोष मुंडे, डॉ ऋचा अग्रवाल, डॉ गुलशन, डॉ गुंजन, डॉ विकास, डॉ फौजिया, डॉ सुनिधि, डॉ हरप्रीत व अन्य डाक्टरों ने शिरकत की और इस नेत्रदान महादान मुहिम को आगे बढऩे का संकल्प लिया। कार्यक्रम में विभाग की और से श्रीमती नीलम रानी, गीता रानी, सुनील कुमार और अन्य नर्सिंग स्टाफ आदि ने अपना सहयोग दिया। संस्थान के निदेशक डॉ कश्यप ने इस कार्यक्रम के संयुक्त आयोजन के लिए कम्युनिटी मेडिसिन और नेत्र रोग विभाग को शुभकामनाएं प्रेषित की।
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