करनाल 28 दिसम्बर, हरियाणा सरकार द्वारा एसिड अटैक यानि तेजाबी हमले से पीडि़त को 8 हजार रूपये की मासिक पैशंन के रूप मेें सहायता दी जाती है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा ऐसे पीडि़त को आजीवन मासिक पेंशन का प्रावधान कर दिया गया है। यह जानकारी उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने दी।
उपायुक्त ने बताया कि लड़ाई-झगड़ा, जानबूझकर या अन्य किसी कारण से महिला या लडक़ी पर किया गया एसिड अटैक उसे विकृत कर देता है। यदि एसिड सांस नली या फूड पाईप में चला जाए तो वह और घातक हो सकता है। धन की कमी के अभाव में कई बार पीडि़त दम भी तोड़ देता है। अब सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा ऐसे पीडि़त को आजीवन मासिक पेंशन का प्रावधान कर दिया गया है।
वित्तीय सहायता प्राप्त करने के मानदण्ड़ क्या हैं:- इस बारे उपायुक्त ने बताया कि व्यक्तियों के अधिकार अक्षमता अधिनियम 2016 के तहत एक महिला या लडक़ी जिसके शरीर का कोई भाग एसिड अटैक से प्रभावित हो जाए, उसे एसिड अटैक पीडि़त माना गया है। उन्होंने बताया कि 2 मई 2011 को या उसके बाद की पीडि़त इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र हैं। पीडि़त अटैक की तारीख से कम से कम 3 साल पहले हरियाणा निवाासी होना चाहिए। पीडि़त स्वयं आवेदन कर सकता है, यदि अयोग्य हो तो किसी दूसरे व्यक्ति से भी आवेदन करवा सकता है। वित्तीय सहायता मासिक पेंशन के रूप में दी जाएगी, जो अक्षमता की प्रतिशतता पर आधारित है। अर्थात 40 से 50 प्रतिशत डिस्एबिलिटी या अक्षमता में दिव्यांग पेंशन का अढाई गुणा, 51 से 60 प्रतिशत अक्षमता में साढे 3 गुणा तथा 61 प्रतिशत या उससे ऊपर की अक्षमता में साढे 4 गुणा, मासिक दिव्यांग पेंशन दी जाती है।
आवेदन का तरीका क्या है:- इस बारे उपायुक्त ने बताया कि पीडि़त को स्वयं या उसके माता-पिता या कानूनी वारिस के माध्यम से लाभ प्राप्त करने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में आवेदन देना होगा। यदि पीडि़त छोटा है, तो उसके अभिभावक या संरक्षक आवेदन कर सकते हैं। यदि पीडि़त विवाहित महिला है तो उसके पति अभिभावक या संरक्षक आवेदन दे सकते हैं।
आवेदन के साथ लगाने होंगे यह दस्तावेज:- जिला स्तरीय मैडिकल बोर्ड द्वारा जारी मैडिकल प्रमाण पत्र, एफ.आई.आर./शिकायत की प्रति तथा पीडि़त द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग से ली गई राहत राशि की प्रति भी साथ लगानी होगी।
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