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जल को बचाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र व राज्य सरकारों ने साथ मिलकर गम्भीर प्रयास शुरू कर दिए हैं

करनाल 2 जुलाई, प्रकृति की अमूल्य देन जल को बचाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र व राज्य सरकारों ने साथ मिलकर गम्भीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसे लेकर जल शक्ति अभियान चलाया गया है। मंगलवार को अभियान की केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव रेखा शुक्ला ने करनाल आकर उपायुक्त सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर जल संरक्षण के लिए सभी जरूरी पहलुओं पर मंथन किया।

उन्होंने बताया कि पिछले करीब दो दशकों में पानी की उपलब्धता वाले राज्यों में इसका अत्याधिक दोहन होने से भूमिगत पानी निचले स्तर तक चला गया है। दूसरी ओर सामान्य वर्षा तथा जल सरंक्षण की जागरूकता की कमी के चलते कई राज्यों में पानी का गम्भीर संकट दिखाई देने लगा है। देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं रही, कई क्षेत्र डार्क जोन में आ गए हैं। यदि यही स्थिति लगातार बनी रही तो अगला विश्व युद्घ सम्भवत: पानी को लेकर होगा। इन सब बातों को देखते हुए अब जोर-शोर से जल को बचाने की मुहिम शुरू हो गई है। स्वच्छ भारत मिशन की तरह हर व्यक्ति को इस अभियान के साथ जोडक़र जन अंदोलन बनाना है। उन्होंने बताया कि हमारे देश में स्वच्छ जल की उपलब्धता केवल 4 प्रतिशत है, जबकि इसका दोहन अत्याधिक रूप से हुआ है। परम्परागत तालाब, बावड़ी व झीलें सूखने लगी हैं। इस तरह की गम्भीर स्थिति को देखते हुए जल शक्ति मंत्रालय भी बनाया गया है, जिसका उद्ïदेश्य जल संरक्षण और इसके प्रबंधन के लिए सभी उपायों को करना है। जल शक्ति अभियान के तहत देश में 254 जिलों की पहचान की गई है और इतनी संख्या में प्रभारी अधिकारी लगाए गए हैं। इनके सहयोग के लिए तकनीकि अधिकारी भी हैं।

न्होंने बताया कि जल शक्ति अभियान का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी ने मिलकर जल का संचय करना है। इसके लिए जागरूकता और प्रचार पर जोर दिया जाना है। सरकारी अमले के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठन, नेहरू युवा केन्द्र, एन.एस.एस. व एन.सी.सी. के स्वयं सेवक, स्कूल व कॉलेजों के विद्यार्थी तथा जल विभागों से जुड़े अभियांत्रिकी अधिकारियों का सहयोग लेकर अभियान को आगे बढ़ाना है, जिसमें आई.ई.सी. यानि इन्फोर्मेशन एजूकेशन व कम्यूनिकेशन पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ-साथ पंचायती राज, ग्रामीण पढ़े-लिखे युवा, लंबरदार तथा शहरी क्षेत्रो में आर.डब्ल्यू.ए. को साथ लेकर अभियान को गति दी जाएगी।

संयुक्त सचिव ने आगे बताया कि सरकार के सीधे हस्तक्षेप से गांव में उपलब्ध तालाबों को रिवाईव अथवा पुन: प्रवर्तन किया जा रहा है। इसके लिए हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में तालाब व अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया है। वेस्ट पानी को पुन: प्रयोग में लेने के लिए ट्रीटमेंट प्लांटों को ओर अधिक सक्षम बनाया जाएगा, ताकि पेयजल को बचाया जा सके। सरकारी, पंचायती भूमि, सडक़ों के किनारे तथा शिक्षण संस्थाओं के परिसर में अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनका संरक्षण किया जाएगा, इनमें स्थानीय व परम्परागत पेड़ जैसे ईमली, नीम, सिम्बल व अमलताश जैसे पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाएगी। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को ओर अधिक सशक्त बनाया जाएगा। सभी सरकारी भवन, शिक्षण संस्थान, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के आवासीय क्षेत्रो में निर्माण से पहले रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना अनिवार्य किया गया है। आवश्यकता अनुसार क्षेत्रों में जल संग्रहण यानि वाटर शैड विकसित किए जाएंगे।

उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि जल की बचत के लिए एक योजनाबद्घ तरीके से काम करना है, ऐसा कार्य किया जाए जिसकी मेजरमेंट हो यानि आसानी से पता लगाया जा सके कि कितना कार्य हुआ है। प्रत्येक चीज विजीबल हो, जिससे पता चले कि पहले क्या था और अब क्या परिवर्तन हुआ है। अभियान में सभी गांवो को शामिल करके लेागों को जागरूक किया जाए।

उपायुक्त करनाल विनय प्रताप सिंह ने बैठक में बताया कि देश में पानी की भारी समस्या है, करनाल जिला में जल संरक्षण के लिए अनेक उपाय किए जा रहे हैं। कृषि विविधीकरण के तहत जिला के 12 हजार हेक्टेयर में धान की जगह मक्कई की खेती करने के लिए किसानो को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें उन्हे नि:शुल्क बीज तथा 2 हजार रूपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक अभियान चलाकर जिला के 243 गांवो में पेयजल नलों पर टूंटियां लगाई गई हैं। इन्टेग्रेटिड वाटर मेनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत जिला के ओवर एक्सप्लोटिड व डार्क जोन के खण्ड़ करनाल के 5 गांवो में वाटर कंजर्वेशन एंड वाटर हार्वेस्टिंग कार्यक्रम चलाया गया है। इसके तहत गांव सरफाबाद माजरा, सलारपुर, सुभरी, रूकनपुर व संगोहा में मौजूदा तालाब का पुर्नउदार किया गया है। तालाबों में भरे फालतू पानी को पाईप लाईन के जरिए एक नया तालाब खोदकर उसमें वाटर रिचार्ज सिस्टम बनाया गया है। इसके अतिरिक्त शहर के राजकीय कॉलेज व 24 स्कूलों में वाटर रिचार्ज पिट बनाई गई हैं। नगर निगम की ओर से अर्बन एरिया में एक नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट फूसगढ़ क्षेत्र में बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सैक्टर-4 व शिव कॉलोनी में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को खत्म करके उनकी जगह नवीनतम तकनीक से प्लांट तैयार किए जा रहे हैं। महाग्राम योजना के तहत जिला के गांव काछवा में सीवरेज सिस्टम प्रगति पर चल रहा है। सूक्ष्म सिंचाई योजना को भी बढ़ावा दिया जाएगा। जो किसान नया नलकूप लगाने के लिए कनैक्शन लेगा, उसे हाईड्रोलोजी विभाग से एन.ओ.सी. लेनी पड़ेगी, जिसमें स्पष्टï करना होगा कि उसके पास ड्रिप इरीगेशन सिस्टम है।

बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त अनिश यादव के अतिरिक्त नगराधीश, तालाब व अपशिष्ट जल प्रबधन प्राधीकरणक के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तथा जन स्वास्थ्य व सिंचाई विभाग के अधीक्षण व कार्यकारी अभियंता, भी उपस्थित थे।

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