करनाल 06 सितम्बर, जल शक्ति अभियान की केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव रेखा शुक्ला ने बुधवार को अपने प्रस्तावित दौरे के कार्यक्रम अनुसार गांव कुंजपुरा, दरड़ व सलारू में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व सोख्ता गढ्ढा से जल संरक्षण के प्रबंधों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कहा कि जल शक्ति अभियान को एक जन आंदोलन बनाने के लिए आम जनता की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। हरियाणा तालाब व अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी व जिला प्रशासन के अधिकारी भी दौरे में उनके साथ थे।
संयुक्त सचिव रेखा शुक्ला ने सबसे पहले गांव कुंजपरा में पहुंचकर अमृत जैविक खाद फार्म का निरीक्षण किया। इस मौके पर फार्म के मालिक ने बताया कि गऊशालाओं से गोबर लेकर जैविक खाद के साथ-साथ बायोगैस भी तैयार की जा रही है। इतना ही नहीं जैविक खाद के प्रयोग से अन्य रसायनिक खादों की अपेक्षा फसलों में पानी कम लगता है तथा फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। इसके बाद संयुक्त सचिव ने गांव दरड़ का दौरा किया और गांव के तालाब तथा रेन वाटर होर्वेस्टिंग सिस्टम को देखा। उन्होंने ग्राम पंचायत की इस कार्य के लिए सराहना की। इस मौके पर उन्होंने ग्राम पंचायत व प्रगतिशील किसानों से जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और सुझाव मांगे ताकि पानी को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में बचाया जा सके। उन्होंने ग्राम पंचायत को निर्देश दिए कि तालाबों पर किसी तरह के अवैध कब्जे न हों तथा इनमें स्वच्छ जल की व्यवस्था बनी रहे ताकि पशुओं के लिए पीने के पानी का प्रबंध हो सके, और भूमिगत जल का स्तर बढ़ सके। उन्होंने कहा कि पंचायती भूमि, सडक़ों के किनारे तथा शिक्षण संस्थाओं के परिसर में अधिक से अधिक पौधे लगाएं, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाएं।
संयुक्त सचिव ने गांव दरड़ के बाद गांव सलारू व रम्बा का दौरा किया। उन्होंने गांव सलारू में बने तालाब की सफाई के आदेश दिए तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निरीक्षण किया। उन्होंने हरियालीकरण के तहत ग्रामवासियों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने ग्राम पंचायत से अपील की कि स्कूल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाएं तथा टूंटियों को खुली न छोडें इससे लाखों लीटर बेशकीमती जल की बर्बादी होती है। उन्होंने कहा कि जल बचाओ जैसे गंभीर विषय को सफल बनाने के लिए आम जनता में जागरूकता जरूरी है। इसके लिए जिला प्रशासन, स्वंयसेवी संस्थाओं एवं पंचायतों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
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