करनाल 03 जुलाई, जल शक्ति अभियान की केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव रेखा शुक्ला ने बुधवार को अपने प्रस्तावित दौरे के कार्यक्रम के अनुसार गांव दादूपुर खुर्द, नीलोखेड़ी शहर, मनक माजरा, घीड़ तथा नगरनिगम क्षेत्र सैक्टर 7 पार्क व सैक्टर 32 रिहायशी मकानों में बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जल संरक्षण के प्रबंधों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा लोगों से सुझाव मांगे और कहा कि जल शक्ति अभियान को एक जन आंदोलन बनाने के लिए आम जनता की भागीदारी जरूरी है। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह, नगरनिगम के आयुक्त राजीव मेहता, जन स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षक अभियंता रमेश कुमार, कार्यकारी अभियंता अशोक खंडूजा व विक्रम सिंह, नगरनिगम के चीफ इंजीनियर रमन शर्मा, हुडा के कार्यकारी अभियंता धर्मबीर, जिला उद्यान अधिकारी डा. मदन लाल, कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी सुनील बजाड़, हरियाणा तालाब व अपशिष्ट जल प्रबधन प्राधिकरण के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी भी दौरे में उनके साथ थे।
संयुक्त सचिव रेखा शुक्ला ने सबसे पहले गांव दादूपुर खुर्द पहुंचकर ग्राम पंचायत व प्रगतिशील किसानों से जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और सुझाव मांगे ताकि पानी को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में बचाया जा सके। उन्होंने ग्राम पंचायत को निर्देश दिए कि तालाबों से अवैध कब्जे तुरंत हटवाएं और इनकी मनरेगा योजना के तहत सफाई करवाएं तथा इनमें स्वच्छ जल की व्यवस्था करें ताकि पशुओं के लिए पीने के पानी का प्रबंध हो सके, और भूमिगत जल का स्तर बढ़ सके। उन्होंने कहा कि वेस्ट पानी को पुन: प्रयोग में लेने के लिए ट्रीटमेंट प्लांटों को ओर अधिक सक्षम बनाया जाएगा, सरकारी, पंचायती भूमि, सडक़ों के किनारे तथा शिक्षण संस्थाओं के परिसर में अधिक से अधिक पौधे लगाएं, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाएं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की जल ही जीवन योजना के तहत धान की जगह मक्का व अरहर की कास्त करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और अनुदान राशि, बीज तथा फसल का बीमा किया जा रहा है। किसानों को सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर जल संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इस मौके पर प्रगतिशील किसान राजबीर व ऋषिपाल ने बताया कि पिछल वर्ष की तुलना में इस वर्ष उन्होंने छ: से सात एकड़ अधिक जमीन में मक्के की बिजाई की है, डायरी फार्मिंग को भी अपनाया है और इसके लिए दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पानी के अत्याधिक दोहन होने से भूमिगत पानी निचले स्तर तक चला गया है। दूसरी ओर सामान्य वर्षा तथा जल सरंक्षण की जागरूकता की कमी के चलते कई राज्यों में पानी का गम्भीर संकट दिखाई देने लगा है। देश के कई क्षेत्र डार्क जोन में आ गए हैं। इस गम्भीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार द्वारा हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है, जिसका उद्ïदेश्य जल संरक्षण और इसके प्रबंधन के लिए सभी उपायों को करना है। उन्होंने कहा कि जल शक्ति अभियान का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकारी अमले के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठन, नेहरू युवा केन्द्र, एन.एस.एस. व एन.सी.सी. के स्वयं सेवक, स्कूल व कॉलेजों के विद्यार्थी तथा जल विभागों से जुड़े अभियांत्रिकी अधिकारियों का सहयोग लेकर अभियान को आगे बढ़ाना है, जिसमें आई.ई.सी. यानि इन्फोर्मेशन एजूकेशन व कम्यूनिकेशन पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ-साथ पंचायती राज, ग्रामीण पढ़े-लिखे युवा, लंबरदार तथा शहरी क्षेत्रो में आर.डब्ल्यू.ए. को साथ लेकर अभियान को गति दी जाएगी।
संयुक्त सचिव ने गांव दादूपुर खुर्द के बाद नीलोखेड़ी शहर में बने एसटीपी का निरीक्षण किया और गंदे पानी को स्वच्छ बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली तथा कहा कि इस स्वच्छ पानी को खेती के कार्य में प्रयोग करने के लिए अधिक से अधिक किसानों को प्रेरित करें। इसके अलावा नई कॉलोनियों में ब्लैक व ग्रे वाटर की अलग-अलग पाईप लाईन बिछाने की व्यवस्था करें। इसके उपरांत मनक माजरा में जन स्वास्थ्य विभाग के टयूबवैल से पानी की सप्लाई व्यवस्था के बारे में जानकारी ली और ग्राम पंचायत से अपील की कि स्कूल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तथा टूंटियों को खुली न छोडें।
संयुक्त सचिव ने गांव घीड़ में मान फार्म पर पहुंचकर धान की सीधी बिजाई व ड्रिप सिस्टम से धान की सिंचाई की विधि के बारे में व इससे होने वाले जल संरक्षण तथा उत्पादन के बारे में किसान से जानकारी ली। किसान रणबीर मान ने बताया कि जल संरक्षण के लिए नई तकनीक को अपनाकर आधुनिक तरीके से धान, पानी की कम खपत वाली फसलों का उत्पादन उनके द्वारा किया जा रहा है। अमरूद का बाग लगाया गया है जब तक ये पौधे बड़े नहीं होते तब तक इसमें चना, मूंग, उड़द की फसल लेता रहूंगा। रेखा शुक्ला ने करनाल शहर की जनकपुरी कॉलोनी में स्थित आधुनिक पौधों की नर्सरी का अवलोकन किया। नर्सरी के संचालक नितिन ललित ने बताया कि सीमेंट व बजरी से बने गमलों की जगह प्लास्टिक के गमलों में सजावटी व औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं। इस विधि में पानी की लागत कम होती है।
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