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जिला बाल संरक्षण कार्यालय द्वारा शुक्रवार को पोक्सो एक्ट 2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम 2015 से सम्बन्धित एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया

करनाल 1 फरवरी, जिला बाल संरक्षण कार्यालय द्वारा शुक्रवार को पोक्सो एक्ट 2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम 2015 से सम्बन्धित एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में राजबाला, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, करनाल उपस्थित रहीं। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही स्कीमों जैसे आपकी बेटी हमारी बेटी, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना इत्यादि की जानकारी दी गई। उनके द्वारा आंगनवाड़ी में बच्चों को दिये जाने वाले पूरक पोषाहार की भी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में 32 गांवों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी लगभग 70 महिलाओं द्वारा भाग लिया गया जो कि अर्पणा रिसर्च एंडचैरिटी ट्रस्ट, मधुबन के साथ जुड़ी हुई हैं। उमेश चानना द्वारा सभी प्रतिभागियों को किशोरन्याय अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया गया कि यदि आपको कोई बेसहारा व जरुरतमंद, अनाथ, गुमशुदा, बाल श्रम, बाल विवाह, यौन शोषण इत्यादि से सम्बन्धित कोई भी बच्चा मिलता है तो आप चाईल्ड हैल्पलाईन नं0 1098 पर फोन कर सकते हैं। उसकी सूचना बाल कल्याण समिति व जिला बाल संरक्षण कार्यालय में सम्पर्क करके दे सकते हैं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी रीना रानी द्वारा बताया गया कि वर्तमान में बच्चों के साथ दिन-प्रतिदिन यौन अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इनको रोकने हेतु सरकार द्वारा पोक्सो एक्ट 2012 लागू किया गया है। इस कानून के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों (लडक़ा तथा लडक़ी) दोनों को यौन शोषण से संरक्षण प्रदान किया जाता है। उनके द्वारा सभी को पोक्सो एक्ट की जानकारी देते हुए बताया गया कि यदि 18 वर्ष तक के बच्चों के साथ किसी भी व्यक्ति द्वारा यौन शोषण, दुराचार, अश्लील वीडियो या अश्लील फोटो दिखाना या बनाना इत्यादि करता है तो पोक्सो एक्ट के तहत अलग-अलग सजाओं का प्रावधान है। उन द्वारा सभी प्रतिभाागियों से आवाहन किया गया कि हमें अपने बच्चों को गुडटच व बैडटच की जानकारी देनी चाहिए। बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण को बदनामी के डर से छुपाने की बजाये हमें उसकी रिपोर्ट 1098, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण कार्यालय अथवा पुलिस थाने में करनी चाहिए ताकि हम अपने बच्चों को सुरक्षा प्रदान कर सके।
इसके साथ-साथ महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में सविता राणा द्वारा जानकारी दी गई। किसी भी तरह की हिंसा से पीडि़त महिलाओं के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रत्येक जिले में वनस्टॉप सैंटर स्कीम शुरु की गई है। इस स्कीम के तहत घरेलू हिंसा, बलात्कार पीडि़त, एसिड अटैक, तस्करी, दहेज उत्पीडऩ, बाल विवाह, यौन शोषण इत्यादि से पीडि़त महिलाओं को एक ही छत के नीचे सारी सुविधायें जैसे परामर्श सुविधा, चिकित्सक सुविधा, पुलिस सहायता, कानूनी सहायता, दुर्घटनास्थल सेे केन्द्रत कलेकर आने की सुविधा, पांच दिन रहने की सुविधा प्राप्त कर सकती है। इस केन्द्र का मुख्य उद्देश्य पीडि़त महिलाओं को एक ही छत के नीचे सारी सुविधायें उपलब्ध करवाना है ताकि पीडित महिला को अलग-अलग जगह न भटकना पड़े।
इस अवसर पर संरक्षण अधिकारी सुमन नैन, अर्पणा ट्रस्ट मधुबन के प्रोग्राम कोर्डिनेटर ईश भटनागर, बाल कल्याण समिति की सदस्या सीमा राणा, मीना काम्बोज, शोभना चौधरी व चन्द्र प्रकाश, वन स्टाप सैंटर के संजीव, रुचि, संगीता, निधि, किरण, रवि, किरणपाल इत्यादि उपस्थित रहे।

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