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जीवन के अभाव और कमियों को दूर करने के लिए गीता एक अमूल्य रत्न: विज

कुरुक्षेत्र, 14 दिसम्बर  हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि जीवन के अभाव और कमियों को दूर करने के लिए गीता एक अमूल्य रत्न है जिससे ज्ञान, कर्म, धर्म, सांख्य और भक्ति योग की साधना की जा सकती है।

स्वास्थ्य मंत्री शुक्रवार को कुरूक्षेत्र के अन्र्तराष्ट्रीय गीता जंयती महोत्सव में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गीता न केवल आनंद से जीने का मार्ग दिखाती है बल्कि पथ भ्रष्ट लोगों को सही मार्ग चयन में भी सहायता करती है। उन्होंने कहा कि गीता परमात्मा के परामनंद को प्राप्त करने के लिए आनंद का ट्रेड मार्क है, जिसका भगवान श्री कृष्ण ने गीता के18 अध्यायों के पहले श£ोक से अंतिम श£ोक तक विवरण किया है। उन्होंने कहा कि गीता सफलता की वह कुंजी है जिससे जीवन की समस्त खुशियों को प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही हरियाणा की शैली पूरी तरह से प्राचीन शैली है जोकि हड्ड़पा कालीन संस्कृति से मिलती जुलती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हरियाणा की राखीगढ़ी में की गई खुदाई में 7 हजार वर्ष पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं जहां की नालियों, सडक़ों तथा घरों में पाई गई इंटें तथा अन्य सामान पूरी तरह से आज के समरूप पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि गीता की प्राचीनता को पढऩे के लिए सबसे पहले हमें स्वयं को पढऩा होगा ताकि गीता की हकीकत और मर्म को समझा जा सके। गीता एक ऐसा शास्त्र है जिससे विश्व की सभी समस्याओं को हल करने में सहायता मिलती है। इसलिए हमें इस गीत को हमेशा गाते हुए गीता को मनाते और गीता को अपनाते रहना चाहिए ताकि समाज और देश का उत्थान किया जा सके।

इसके उपरांत श्री विज ने पुरूषोत्माराबाग में लगाए गए स्टालों का भ्रमण किया जिसके दौरान उन्होंने मुगलकालीन एवं प्राचीन पुराने सिक्कों, हाथ से बनी चारपाईयों तथा अन्य स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विजिटर बुक में सिक्कों एवं मेले के बारे में लिखा की यह एक महान संग्रह है जोकि भारतीय प्राचीन सभ्यता के दर्शन करवाता है। भ्रमण के दौरान बागडी लौहारों द्वारा स्वास्थ्य मंत्री को लोहे की एक कड़ाही भेंट की जिसकी मंत्री ने दो हजार रूपये कीमत चुकाकर उनका आभार व्यक्त किया। हालांकि पहले तो बागड़ी लौहार कड़ाही को केवल भेंट स्वरूप देना चाहते थे परन्तु मंत्री ने इसे लेने से मना कर दिया और ज्यादा बाध्य करने पर उन्होंने कड़ाही के दो हजार रूपये बागड़ी लौहार को भेंट कर दिए।

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