कुरूक्षेत्र,11 जनवरी : गऊशाला बाजार स्थित श्रीझूलेलाल मंदिर में शुक्रवार को साप्ताहिक झूलेलाल अमरकथा सुनाई गई। व्यवस्थापक रामलाल ठाकुर ने पिछली कथा से आगे का वर्णन करते हुए कहा कि लालसाईं ने अपनी माया से पंडित के दिल का भ्रम पूरी तरह से मिटा दिया और लोक मर्यादा रखने के लिए पंडित जी के कहे अनुसार पढऩे लगे। 8 वर्ष की आयु में उन्होंने सभी धर्म नीति वेद शास्त्रों का अभ्यास कर लिया था। तब पंडित ने उनके पिता को राय दी कि लाल साईं का यज्ञोपवित संस्कार किया जाए और इसी ज्ञानी विद्वान से इन्हें दीक्षा दी जाए। एक दिन जब रतन राय बालक उडेरोलाल के साथ जा रहे थे तो एक ऋषि उन्हें मार्ग में मिले, जिसे रतन राय ने प्रणाम किया। उन्होंने मन ही मन सोचा कि यह कोई देवता है, जिसने ऋषि का वेश धारण किया हुआ है। उन्होंने ऋषि से आग्रह किया कि वे बालक उडेरोलाल को अपना शिष्य बनाएं। ऋषि ने उन्हें समझाया कि लोक मर्यादा के लिए गुरू मंत्र देना आवश्यक है, इसलिए तुम गुरू गोरख नाथ से यज्ञोपवित संस्कार करवाओ। तत्पश्चात वह ऋषि अंतर ध्यान हो गए। कथा के पश्चात महिला श्रद्धालुओं द्वारा कीर्तन किया गया। झूलेलाल आरती में पं. तारादत्त पांडे, पुजारी ललित शर्माआदि ने भाग लिया।
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