करनाल 12 जून: उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से गठित जिला टास्क फोर्स की मीटिंग बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में नगराधीश नवीन आहुजा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार, उप-सिविल सर्जन डॉ. राजेन्द्र कुमार, डॉ. सरोज, डॉ. कुलबीर, डॉ. मंजू पाठक, डीपीओ आईसीडीएस राजबाला, एसएमओ, डबल्यूएचओ, डॉ. अवरिल शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, रोटरी क्लब के सदस्य सुभाष नारंग व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर नगराधीश नवीन आहुजा ने पल्स पोलियो अभियान से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि 0 से 5 वर्ष तक की आयु के हर बच्चे को पोलियो रोधक दवा पिलवाना सुनिश्चित करें, कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रहे। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी अपने 0 से 5 साल के बच्चों को 16 जून को नजदीकी बूथ पर पहुंचकर पोलियो की बूंदे अवश्य पिलवाएं।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के 13 जिलों में 16 जून से 18 जून तक सब-नेशनल पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। जिला में 0 से 5 साल तक के 205611 बच्चों को दवाई पिलाने के लिए 844 बूथ और 1495 हाऊस टू हाऊस टीमें बनाई गई हैं, जिनकी निगरानी 151 सुपरवाईजर द्वारा की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 92 मोबाईल टीमें जिसमें 54 ट्रांजिस्ट टीम तथा कुल 3237 कर्मचारी व अधिकारी इस कार्य में भाग लेंगे। इसके लिए सारी तैयारियां हो चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में जनवरी 2010 कोई पोलियो केस सामने नहीं आया है और भारतवर्ष में जनवरी 2011 से पोलियो का कोई केस नहीं मिला है। इसलिए भारतवर्ष को 11 फरवरी 2014 को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अब की बार जिले के हाई रिस्क एरिया जैसा कि भट्टे, डेरे, फैक्ट्रियां, राईस मिल्स, स्लम एरिया, झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे बच्चों को पोलियो की बूंदे पिलाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा क्योंकि ऐसी जगह पर माईग्रेटरी पोपुलेशन होती है जहां पर पोलियो फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। वर्ष 2010 में हरियाणा तथा वर्ष 2011 में भारतवर्ष का आखिरी पोलियो केस भी माईग्रेटरी पोपुलेशन का ही था।
उन्होंने बताया कि बस स्टैंड पर पोलियो बूथ बनाए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले बच्चों को भी पोलियो की बूंदे पिलाई जा सकें और हरियाणा को पोलियो मुक्त बरकरार रखा जा सके। उन्होंने कहा कि हमने अपने पोलियो निगरानी सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाया है ताकि किसी अन्य देश से कोई भी पोलियो केस भारत में न आ सके।
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