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पवित्र ग्रंथ गीता पर 60 दिन मंथन करने के बाद फरवरी में होगी बड़ी गीता संसद: ज्ञानानंद

कुरूक्षेत्र, 17 दिसम्बर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर 5 हजार 156 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश देकर पूरे विश्व को ज्ञान का प्रकाश देने का काम किया। इस पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश आज भी पूरी तरह प्रांसिगक है। इन उपदेशों के साथ दुनिया खासकर युवा पीढ़ी को जोडऩे का प्रयास राज्य सरकार की तरफ से किया जा रहा है। इन प्रयासों के चलते ही प्रदेश के 5 जिलों के 36 कालेजों में गीता संसद कार्यक्रम को शुरु किया गया है। इन कालेजों में लगातार 60 दिन पवित्र ग्रंथ गीता पर मंथन किया जाएगा और फरवरी माह में एक बड़ी गीता संसद का आयोजन सरकार की तरफ से किया जाएगा।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने वीडियों कान्फें सिंग से किया गीता संसद का शुभारम्भ, 5 जिलों के 36 कालेजों से हुआ सीधा संवाद, कालेजों में करीब 2 माह तक होगा पवित्र ग्रंथ गीता पर मंथन
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद सोमवार को लघु सचिवालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए 5 जिलों के 36 कालेजों के प्रिंसीपल और विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर रहे थे। इससे पहले गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, उपायुक्त डा. एसएस फुलिया, हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष व निदेशक प्रोफेसर विरेन्द्र चौहान, केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, केडीबी के सीईओ संयम गर्ग ने विधिवत रुप से कम्पूयटर का क्लीक करके 36 कालेजों में गीता संसद कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि सभी कालेजों में गीता संसद का आयोजन अन्र्तराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अन्र्तगत गीता कौशल के माध्यम से कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड, हरियाणा ग्रंथ अकादमी, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय और महर्षि वाल्मीकि संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गीता व्यक्ति के व्यक्तितत्व को प्रकट करती है, गीता जीवन की प्ररेणा देती है। भगवत गीता मेें कोई जातिवाद नहीं है, सबको मिलजुल कर जीने की शिक्षा देती है। विद्यार्थी महाविद्यालय में कुछ बनने के लिए आते हैं, जीवन में आपकी उन्नति हो, इसी उद्देश्य से आप पढ़ाई करें तथा माता-पिता व अपने शिक्षकों का सम्मान करें। 
उन्होंने कहा कि पाठन/वाचन किसी भी ज्ञान कोष से जुडऩे का प्रथम सोपान है। निधिघ्यासन दूसरा सोपान है, जो तीसरे सोपान अनुपालन की ओर लेकर जाता है। अनुपालना से ही ज्ञान जीवित होता है। गीता मात्र पाठन व वाचन तक सीमित न रहे अपितु गीता का ज्ञान व्यवहार, मानवीय कौशल का हिस्सा बने इसी उद्देश्य से गीता कौशल कार्यक्रम के माध्यम से गीता संसद कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष व निदेशक प्रो. विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि यह कार्यक्रम प्रदेश के जींद, करनाल, कैथल, कुरूक्षेत्र और पानीपत में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम फरवरी माह तक चलेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में जींद जिले के 6 कॉलेज, करनाल के 11 कॉलेज, कैथल के 5 कॉलेज, कुरूक्षेत्र के 10 कॉलेज तथा पानीपत के 5 कॉलेज शामिल है। 
उन्होंने कहा कि गीता संसद कार्यक्रम के तहत सेमीनार, भाषण प्रतियोगिता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को और प्रत्येक महाविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ तीन प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ-साथ जिलों के प्रबुद्ध नागरिकों को भी शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर उपायुक्त डा. एस.एस.फुलिया ने स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का स्वागत किया तथा कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने आए हुए अतिथियों का धन्यवाद किया। इस मौके पर सीटीएम संयम गर्ग, एआईपीआरओ बलराम शर्मा भी उपस्थित थे।

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