Breaking News
Home / Gita Mahotsav / ब्रहमसरोवर पर नजर आए भारत की सांस्कृतिक और शिल्प कला के झरोखे

ब्रहमसरोवर पर नजर आए भारत की सांस्कृतिक और शिल्प कला के झरोखे

कुरुक्षेत्र 17 दिसम्बर धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के ब्रहमसरोवर पर भारतवर्ष की सांस्कृतिक और शिल्पकला के झरोखे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आनंदित कर रहे है। इस महोत्सव में शिल्पकला और संस्कृति के यादगार लम्हों को अपने जीवन के हसीन क्षण बनाने के लिए हरियाणा ही नहीं भारत वर्ष से लोग कुरुक्षेत्र की तरफ अग्रसर हो रहे है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल रविवार को ही लाखों पर्यटक महोत्सव का आनंद लेने के लिए पहुंचे। अहम पहलू यह है कि सरस मेले में 250 स्टालों से शिल्पकारों ने करीब 1 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिक्री कर ली है।
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव-2018 के तमाम क्षणों को यादगार बनाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी गई है। इस महोत्सव को अगर देश की संस्कृति और शिल्पकला का केन्द्र बिन्दू कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इस महोत्सव के शिल्प मेले में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला की तरफ से 21 से ज्यादा राज्यों के 200 से ज्यादा शिल्पकार पहुंचे है। इन शिल्पकारों में 90 शिल्पकारों को राष्टï्रीय, राज्य, संत कबीर दास सहित अन्य अवार्ड मिल चुके है। इसके अलावा सरस मेले में 17 राज्यों के 250 से ज्यादा शिल्पकार पहुंचे है। इन शिल्पकारों की शिल्पकला को निहारने के लिए रोजाना लाखों पर्यटक पहुंच रहे है। अगर एडीसी कार्यालय के डीपीएम शिवांशु मिश्रा की माने तो इस सरस मेले में अब तक 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का व्यवसाय हो चुका है। इन आंकड़ो से सहजता से आंकलन किया जा सकता है कि यह महोत्सव शिल्पकारों के लिए आर्थिक रुप से भी एक विशेष महोत्सव के रुप में पहचान बना चुका है।
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव बना सांस्कृतिक और शिल्प कला का केन्द्र, केवल सरस मेले में 250 स्टालों से शिल्पकारों ने बेचा 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का समान, दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है पर्यटकों और श्रृद्घालुओं की भीड़, प्रत्येक पर्यटक उठा रहा है कला और विभिन्न व्यंजनों आनंद
शिल्पकला के साथ-साथ पर्यटकों को 14 राज्यों की लोक संस्कृति से भी रुबरु होने का अवसर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला की तरफ से दिया गया है। इस महोत्सव में वेस्ट बंगाल का नटवा, उतर प्रदेश का मयूर व बरसाना की होली, गुजरात का डांडिया, मणीपुर लाईव हरिबा, झारखंड का छाउ, मध्यप्रदेश का गंगोर व बदाई, महाराष्टï्र का लावणी, त्रिपुरा का होजागिरी, आसाम का बिहू, जम्मू कश्मीर का डोगरी व हिमाली, राजस्थान का कालबेलिया, घूम्मर व बब्बई, पंजाब का गिद्दा व भांगड़ा, हिमाचल का सिरमौरी नाटी, उतराखंड का छपेली लोक नृत्य ने पर्यटकों को अपने मोहपास में बांधने का काम किया है। इसके अलावा पंजाब के 8 बाजीगर, राजस्थान से 4 बहरुपिए और राजस्थान की कच्ची घोड़ी तथा हरियाणा की बीन बांसुरी और नगाड़ा पार्टी की थाप पर्यटकों को झूमने पर मजबूर कर रही है। इसलिए ब्रहमसरोवर के पावन तट पर भारत की संस्कृति और शिल्पकला का केन्द्र बन चुके है और एक ही तट पर भारत की संस्कृति को देखा जा सकता है।
विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में हर प्रकार की व्यवस्था की गई है। इस महोत्सव को राज्य सरकार लगातार बड़े महोत्सव का दर्जा देने का काम कर रही है। सरकार के प्रयासों से ही फरवरी 2019 में मॉरीशिस की धरा पर गीता जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

About postnow

Check Also

ब्रहमसरोवर के तट पर 17 दिनों में 42 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने उठाया महोत्सव का लुफ्त

कुरुक्षेत्र 23 दिसम्बर – अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2018 ने पर्यटकों की भीड़ जुटाने में एक नया …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *