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पॉलीथिन और प्लास्टिक निर्मित बर्तनो के प्रयोग को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने के लिए नगर निगम ने अपनी सख्ती बढ़ा दी है

करनाल 1 अगस्त: पॉलीथिन और प्लास्टिक निर्मित बर्तनो के प्रयोग को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने के लिए नगर निगम ने अपनी सख्ती बढ़ा दी है। इसके साथ ही इससे जुड़े कानून और एन.जी.टी. के निर्देशों का हवाला देकर नागरिकों का पॉलीथिन से मोह हटाने और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए भी जागरूकता रहेगी। इसके लिए निगम बाकायदा शहर में रेहड़ी और फड़ी वालो को करीब एक क्विंटल गलनशील पॉलीथिन कैरीबैग नि:शुल्क रूप से उपलब्ध करवाएगा। इसके बावजूद भी यदि रेहड़ी और फड़ी वाले हानिकारक पॉलीथिन कैरीबैग में सामान बेचते पाए गए, तो उन पर भारी जुर्माने के साथ-साथ उनकी रेहड़ी व फड़ी को भी जब्त किया जाएगा।

उप निगमायुक्त धीरज कुमार ने निगम के इस निर्णय को मूर्तरूप देने के लिए गुरूवार को सम्बंधित कर्मचारियों के साथ एक बैठक कर उन्हें किस तरह से इसकी गतिविधियां की जानी हैं, इस बारे विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि निगम कर्मचारियों की 4 टीमे पूरे शहर का भ्रमण कर अपना काम करेगी, प्रत्येक टीम में 2-2 कर्मचारी रहेंगे। कर्मचारी दुकान-दर-दुकान जाकर वहां मौजूद पॉलीथिन कैरीबैग और प्लास्टिक निर्मित प्लेट, थाली, चम्मच, कटौरी, डोने इत्यादि के मिलने पर उन्हें जब्त करेगी और मौके पर ही चालान कर जुर्माना ठोकेंगे।
यह रहेंगी जुर्माने की दरें-
0 से 100 ग्राम – 500 रूपये,
100 से 500 ग्राम – 1500 रूपये
500 से 1 किलोग्राम – 3 हजार रूपये
1 से 5 किलोग्राम – 10 हजार रूपये
5 से 10 किलोग्राम – 20 हजार रूपये
10 किलोग्राम से ऊपर – 25 हजार रूपये

नागरिक भी रहें होशियार- सालों से पॉलीथिन कैरीबैग के मोह में फंसे, नागरिक भी होशियार रहें, उनकी भी जवाबदेही रहेगी। निगमायुक्त के अनुसार नागरिक, दुकानदार से पॉलीथिन कैरीबैग में सामान देने के लिए मांग ना करें और ऐसे कैरीबैग में सामान लेने के लिए उन्हें टोका जा सकता है। नगर निगम के कर्मचारी ऐसे नागरिकों पर भी उपर्युक्त भार के हिसाब से जुर्माना लगाएंगे, जो सड़को पर पॉलीथिन कैरीबैग लिए दिखाई देंगे। इसके लिए निगम के पास एन.जी.टी. से प्राप्त निर्देशों की ताकत मौजूद है, जो एनफोर्समेंट के लिए हैं।

निगमायुक्त ने यह भी बताया कि जो लोग अथवा दुकानदार बार-बार समझाने के बावजूद भी पॉलीथिन कैरीबैग का स्टॉक रखने या उसकी ब्रिकी का काम करते हैं, उनके चालान किए जाएंगे और चालान नहीं भुगतने पर एन.जी.टी. की ओर से ऐसे व्यक्तियों पर एक लाख से 10 लाख रूपये तक का जुर्माना लग सकता है। यही नहीं इसके लिए बने एन्वार्यन्मेंट प्रोटेक्शन एक्ट-1986 के तहत 5 साल तक की सजा का भी प्रावधान है।

निगमायुक्त ने लोगों से भी अनुरोध किया है कि सभी धार्मिक स्थल से जुड़े व्यक्ति पॉलीथिन के प्रयोग के खिलाफ चलाई जा रही मुहीम में अपना सहयोग दें। ऐसे लोग स्वयं भी भंडारे इत्यादि कार्यक्रमों में स्टील के बर्तनो का प्रयोग करें।

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