कुरुक्षेत्र, 7 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूआईईटी संस्थान में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् नई दिल्ली के उत्तर क्षेत्र के प्रभारी फतेहगढ़ से डॉ. रामेन्द्र उप्पल ने शुक्रवार को प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज मानव शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भौतिकवाद में अपने आप को ज्यादा व्यस्त रखने लगा है। जिससे उसको खुश रखने के कुछ पल तो मिल जाते हैंं परन्तु यह खुशी अस्थायी होती है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन के हर पहलू में मानवीय मूल्यों का विशेष योगदान होता है। इसलिए मानव को भौतिकवाद को छोडक़र मानसिक विचारधारा पर जोर देना चाहिए ताकि इस दिशा में सकारात्मक परिणाम मिल सकें।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. सीसी त्रिपाठी ने कहा कि नए सत्र में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् की पहल को विद्यार्थियो के साथ जोडक़र संस्थान में कुछ और नया प्रयास करने में सार्थक बढ़ाएंगे ताकि संस्थान में मानवीय मूल्यों का विकास हो सके।
इस मौके पर आरएमके इंजिनियरिंग कॉलेज चैन्नई की प्रतिभागी एस पवई महदेश्वरी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविरों से मानसिक बुद्धि का विकास होता है और इसी विचारधारा को हमने अपने विद्यार्थियों के साथ जोडऩा है। राजकीय महिला कॉलेज अजमेर राजस्थान से सरोज बाला गुप्ता ने कहा कि कई बार व्यक्ति अपने नैतिक मूल्यों को समाज के प्रति निर्वहन नहीं कर पाते परन्तु ऐसे प्रशिक्षण शिविरों से मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करते हैं। एसआरएम कॉलेज से बलबीर पटियाला ने कहा कि आज के दौर में मानवीय मूल्यों का अभाव है। फैकल्टी डैवलेपमैंट कार्यक्रम इन मूल्यों को पूरा करने में अपना अहम योगदान दे रहा है।
इस अवसर पर कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. उर्मिला, डॉ. अनिता ग्रेवाल सहित डॉ. राजेश कालिया, अर्चित शर्मा, रविन्द्र चौधरी, विकास काम्बोज, एकता, शिवानी, ज्योति, शिखा व हरिकेश पपोसा आदि मौजूद थे।
संगीत एवं नृत्य विभाग में बच्चों ने मनाई ईद व कार्यशाला में रही तबले की धूम
कुरुक्षेत्र, 7 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग में 1 जून से आरम्भ संगीत कार्यशाला के चौथे दिन गायन, हारमोनियम, सितार, नृत्य के साथ तबले की धूम रही। एक ओर जहां विद्यार्थियों ने गायन, सितार, हारमोनियम, ढोलक आदि विषयों की बारीकियां सीखी वहीं तबला विषय में बच्चों ने धा, ता, ना जैसे प्रारम्भिक बोल सीखने के साथ ही दादरा ताल की जानकारी तथा उसे तबले पर बजाने की तकनीक सीखी।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. ज्ञान सागर तथा डॉ. विवेक जैन कार्यशाला में तबले का प्रशिक्षण दे रहे हैं। बच्चे पूरे मनोयोग तथा उत्साह के साथ कार्यशाला में बढ़-चढ़ कर तबला के साथ-साथ अन्य विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें है। ईद के अवसर पर बच्चों को विभाग की ओर से जलपान करवाया गया।
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