करनाल 26 मार्च: रबी मौसम में किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा, पेमेंट आढ़तीये के माध्यम से मिलेगी, जिसमें 48 घण्टे से ज्यादा समय नही लगेगा। गेहूं की खरीद एक अप्रैल से की जाएगी, जबकि सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी और 10 मई तक चलेगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने प्रदेश के सभी उपायुक्तो के साथ विडियो कॉन्फ्रैंसिंग के जरिए गेहूं खरीद की तैयारियों पर चर्चा करते हुए यह जानकारी दी। विडियो कॉन्फ्रैंस में प्रधान सचिव के साथ खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी भी उपस्थित थे।
प्रधान सचिव खुल्लर ने कुछ मुख्य बातें उपायुक्तों के साथ शेयर करते हुए बताया कि इस बार गेहूं की पेमेंट को लेकर कुछ नए प्रावधान किए गए हैं। इसके लिए सरकार ने कुछ बैंको से टाईअप किया है। सरकार से पैसा बैंको को जाएगा और बैंको से आढ़तीयों के पास जाएगा, जहां से किसान को पेमेंट होगी। इस प्रक्रिया में बीसीएपी यानि बिलिंग-कम-पेमेंट एजेंट नाम के व्यक्ति को बीच से हटा दिया गया है। उन्होंने एक ओर महत्वपूर्ण बात कही कि यदि आढ़ती के पास बैंक से 7 दिन तक पैसा नही पहुंचेगा, तो उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज सरकार अदा करेगी। इसी प्रकार किसान को भी यदि आढ़ती से पेमेंट में 7 दिन से ज्यादा समय के बाद मिलती है, तो ऐसी सूरत में वह भी आढ़तीये से 12 प्रतिशत ब्याज की मांग कर सकता है।
उन्होंने बताया कि सरसों की खरीद को लेकर सम्बंधित किसान को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर रजिस्टर्ड करवाना अनिवार्य है, अर्थात पंजीकृत किसानो की ही सरसों खरीदी जाएगी। उन्होंने उपायुक्तो को निर्देश दिए कि सरसों की खरीद के लिए वे गांव और उसके साथ लगती मण्ड़ी का रोस्टर बना लें। किस गांव की फसल, किस मण्ड़ी में और किस दिन खरीदी जाएगी, यह सब रोस्टर में ले लें, लेकिन ध्यान रहे कि किसान को सरसों बेचने के लिए दूर की मण्ड़ी ना दी जाए। गांव में चौकीदार के माध्यम से किसानो को उसकी जानकारी भी दी जाए। प्रारम्भ में 15-20 दिन तक सरसों की खरीद हैफेड एजेण्सी करेगी, जिसका लक्ष्य 17 हजार मिट्रिक टन रखा गया है और उसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग करेगा। सरसों की खरीद बाजरा खरीद की तर्ज पर रहेगी। एक किसान एक दिन में 25 क्विंटल तक सरसों, बिक्री के लिए मण्ड़ी में ला सकता है, जिसकी खरीद 4200 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से की जाएगी। उन्होंने कहा कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसान की रजिस्ट्रेशन की वैरीफिकेशन का कार्य मुकम्मल कर लिया जाए।
गेहूं की खरीद को लेकर प्रधान सचिव ने बताया कि जिला के किसानो के साथ-साथ पास लगते प्रदेश के किसान भी मण्ड़ी में अपनी गेहूं ला सकते हैं। इसके लिए उन्हे आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसी आई.डी. देनी होगी। प्रत्येक आमद का गेट पास कटेगा, एंट्री के समय उपज की तुलाई होगी, जे-फार्म भी भरा जाएगा। इस तरह की प्रक्रिया के लिए सक्षम युवाओं की मदद ले लें और उन्हे पहले ट्रेनिंग दे दें। प्रदेश के जिलो से कितनी और बाहर से कितनी गेहूं खरीदी, पहली बार इस तरह का डाटा तैयार हो सकेगा। मण्डिय़ो के बाहर एंट्री पर गाडिय़ो की ज्यादा लम्बी लाईने ना लगे, व्यवस्था के लिए पुलिस की मदद लें। लिफ्टिंग भी समय पर की जाए। उन्होंने उपायुक्तो से कहा कि मण्डिय़ो में बारदाने व लकड़ी के के्रट पर्याप्त मात्रा में हों, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। के्रट की जरूरत को पूरा करने के लिए उपायुक्त शोर्ट टैण्डर लगाकर व्यवस्था कर लें। गेहूं पलींथ यानि खुले स्पेस में रखी जा सकती है, लेकिन सरसों किसी भी सूरत में खुले में नही, बल्कि गोदाम में ही रखी जाएगी। मण्डिय़ो में गेहूं के लिए पोलीथीन कवर के साथ-साथ बिजली चालित झरने, नमी मापक यंत्र, शौचालय तथा पीने का पानी इत्यादि की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर लें।
विडियो कॉन्फ्रैंसिंग मेें करनाल के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बताया कि करनाल जिला में गेहूं खरीद के लिए 23 मण्डिय़ां है, जबकि सरसों की खरीद केवल घरौण्ड़ा मण्ड़ी को अलॉट की गई है। गेहूं खरीद की तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि करनाल जिला के मण्डिय़ो में गत वर्ष 929979 मिट्रिक टन गेहूं की आवक हुई थी, इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने से गेहूं की फसल बम्पर रहेगी और गत वर्ष की तुलना में आवक 15 प्रतिशत बढऩे की उम्मीद है।
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