करनाल 29 जून, लघु सचिवालय स्थित जिला सांख्यिकीय कार्यालय में शनिवार को तेहरवां राष्ट्रीय सांख्यिकीय दिवस मनाया गया। जिसमें जिले के विभिन्न विभागों में सांख्यिकीय सम्बन्धी कार्य करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों सहित जिला संख्यिकीय कार्यालय के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिला सांख्यिकीय अधिकारी संगीता मैहता ने प्रो0 पी0 सी0 महालानोबीस की जन्म वर्षगांठ व उनके द्वारा सांख्यिकीय एवं आर्थिक योजना के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की याद में मनाए जा रहे सांख्यिकीय दिवस पर दीप प्रज्जवलित किया। उन्होंने सम्बोधित करते हुए बताया कि पिछले वर्षों की भांति राष्ट्र आज तेहरवां सांख्यिकीय दिवस मना रहा है। सरकार द्वारा प्रतिवर्ष एक विशेष विषय पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। वर्ष 2019 सांख्यिकीय दिवस मनाने का मुख्य विषय सतत विकास लक्ष्य है।
प्रो0 पी0 सी0 महालानोबीस की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए जिला सांख्यिकी अधिकारी ने बताया कि इनका जन्म कलकत्ता 29 जून, 1893 को हुआ था। उन्होंने सन् 1912 में प्रेसीडेंसी कालेज से भौतिकी विषय में आनर्स किया और उच्च शिक्षा के लिए लन्दन जाकर कैंब्रिज में दाखिला लिया और भौतिकी और गणित दोनो विषयों में डीग्री हासिल की। महालानोबीस का सबसे बडा योगदान उनके द्वारा शुरू किया गया सैम्पल सर्वे की संकल्पना है जिसके आधार पर बडी बडी नीतियां और योजनाएं बनाई जा रही है।
जिला सांख्यिकीय अधिकारी ने उनकी उपलब्धियों का वर्णन करते हुए बताया कि वे एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक एवं सांख्यिकीविद थे। उन्होंने द्वितीय पंच-वर्षीय योजना के मसौदे को तैयार किया। उन्हें महालनोबिस दूरी के लिए भी जाना जाता है। जो उनके द्वारा सुझाया गया एक सांख्यिकीय माप है। प्रो0 साहब वर्ष 1955 से लेकर 1967 तक प्लांनिग कमीशन के सदस्य भी रहे व भारत सरकार द्वारा 1968 में उन्हें पद््म विभूषण से अलंकृृत किया गया।
इस मौके पर क्षेत्रीय सहायक अमित ने भी प्रशांत चन्द्र महालनोबिस की जीवनी, आर्थिक एवं सांख्यिकीय विकास के लिए उनके द्वारा दिए गए योगदान व उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने निर्धारित विषय का जिक्र करते हुए बताया कि वर्तमान युग सांख्यिकीय युग है। हर क्षेत्र में सांख्यिकीय का प्रयोग किया जाता है। केन्द्र तथा राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियां विभिन्न सांख्यिकीय उत्पादों का समय समय पर संग्रहण, संकलन तथा प्रसार करती रही है ताकि सभी मनुष्यों को ऐसा जीवन स्तर उपलब्ध करवाया जाये जो समानता और न्याय पर आधारित हो, विकास प्रक्रिया के नीति निर्माण में सभी पक्षों को निर्णय क्षमता का अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ( नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि 40 प्रतिशत आबादी के लिए पीने लायक पानी नही बचेगा। जल संकट का असर सबसे पहले बड़े शहरों पर पड़ेगा, आयोग ने तीन साल पहले भी चेताया था कि जल संरक्षण को लेकर अधिकांश राज्यों का काम अपेक्षानुरूप नही है। वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध जल वितरण की दुगनी हो जाएगी जिसका मलतब यह है कि करोड़ों लोगों के लिए पानी का गम्भीर संकट पैदा हो जाएगा।
आंकड़ा सहायक शिक्षा विभाग जगबीर सिंह तथा जिला आयुवैदिक कार्यालय धर्मबीर ने भी जिला स्तर पर एकत्रित किए जाने वाले आकड़ें तथा उनकी उपयोगिता बारे जानकारी दी।
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