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वन पर्यावरण को सन्तुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं: विनय प्रताप सिंह

करनाल 24 अगस्त, उपायुक्त विनय प्रताप सिंह का कहना है कि वन पर्यावरण को सन्तुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये कार्बनडाई-आक्साइड गैस पीकर भी हमारे लिए प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। वन ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहायक है। इसके दृष्टिगत हरियाणा सरकार द्वारा हर घर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से हर घर हरियाली नामक योजना चलाई जा रही है। जिसके तहत न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी लोगों की सहभागिता से जिला को हरियाली का चौला पहनाया जा रहा है। धरा को हरा-भरा रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना जरूरी है इतना ही नहीं इनकी सुरक्षा और पालन पोषण भी हम सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों तथा विभिन्न विभागों के माध्यम से खाली पड़ी भूमि पर हर घर हरियाली योजना के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण करवाया जा रहा है। इनमें छायादार वृक्षों के साथ-2 फल-फूल वाले पौधे भी लगाएं जा रहे है। उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्रों में पौधारोपण को पुण्यदायी कार्य बताया गया है। भारतवर्ष में आदि काल से लोग तुलसी, पीपल, केला, बरगद आदि पेड़-पौधों को पूजते आए हैं। आज विज्ञान सिद्ध कर चुका है कि ये पेड़-पौधे हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं । वृक्ष पृथ्वी को हरा-भरा बनाकर रखते हैं । पृथ्वी की हरीतिमा ही इसके आकर्षण का प्रमुख कारण है। जिन स्थानों में पेड़-पौधे पर्याप्त संख्या में होते हैं, वहाँ निवास करना आनंददायी प्रतीत होता है। पेड़-पौधे पशु-पक्षियों को भी आश्रय प्रदान करते हैं।

उपायुक्त ने कहा कि वृक्षों के घटने से वायु प्रदूषण की मात्रा बड़ी है। वृक्ष वायु के प्राकृतिक शोधक होते हैं। धरती पर वृक्षों की पर्याप्त संख्या का होना बहुत आवश्यक होता है । ये वायुमंडल के ताप को अधिक बढऩे से रोकने में बहुत मदद करते हैं। जहां अधिक पेड-पौधे होते हैं वहाँ गर्मियों में भी शीतल हवा चलती है। उन्होंने कहा कि संतुलित पर्यावरण के लिए किसी बड़े क्षेत्र के एक-तिहाई हिस्से पर वनों का होना आवश्यक माना जाता है। लेकिन वर्तमान समय में वन इस अनुपात में नहीं रह गए हैं । इसके हानिकारक परिणाम सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहे हैं । अत: वर्तमान समय की आवश्यकता है कि हर कोई वृक्षारोपण करे । एक पेड़ काटा जाए तो तीन पेड़ लगाए जाएं।

उन्होंने कहा कि महीने का एक दिन वृक्षारोपण के लिए समर्पित होना चाहिए। इस कार्य में विद्यार्थियों को सहभागी बनाया जाए। सडक़ों के किनारे, रिहायशी इलाकों में और जहां थोड़ा भी रिक्त स्थान हो पेड़ लगा दिए जाएं। पेड़ बचेंगे तो जीव-समुदाय बचेगा। पेड़ रहेंगे तो लकड़ी की आवश्यकता की पूर्ति होगी और उद्योगों को कच्चा माल मिलता रहेगा। हमारी आगामी पीढ़ी को पेड़ों के अभाव में कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पेड़ और वन होंगे तो वन्य-जीवन को आश्रय मिलता रहेगा, दुर्लभ वन्य प्राणियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकेगा। इसलिए सब लोगों को पौधे लगाने का संकल्प लेना चाहिए । लोगों को वन-महोत्सव और वृक्षारोपण के अभियान में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।

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