करनाल 18 जुलाई: हरियाणा के कई जिले वर्तमान में पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। कहा गया है कि जल ही जीवन है यानि पानी मनुष्य की एक मूलभूत आवश्यकता है, जिसे बचाया जाना जरूरी है। इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे और लोगों को अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा।
नगर निगम आयुक्त राजीव मेहता ने गुरूवार को इस सम्बंध में बताया कि प्राय: लोग पाईप लगाकर गाडिय़ां व फर्श इत्यादि धोते हैं और ऐसा करके पानी को व्यर्थ बहाते हैं। इस तरह पानी की बर्बादी से भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट हो रही है, जो भविष्य तथा आने वाली पीढ़ीयों के लिए खतरे की घण्टी है। पानी को बचाने के लिए नगर निगम करनाल की ओर से एक प्रस्ताव पास किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है किजो व्यक्ति पाईप लगाकर गाडिय़ां व फर्श इत्यादि धोते हुए पाया गया, तो उससे जुर्माना वसूल किया जाएगा। इस तरह की गलती से पहली बार में 1000 रूपये, दूसरी बार के लिए 2000 रूपये तथा तीसरी बार पाए जाने पर 5000 रूपये का जुर्माना वसूल किया जाएगा।
नगर निगम की ओर से जनता के नाम यह भी अपील है कि प्रकृति की अनमोल देन पानी को बचाने के लिए इसे व्यर्थ ना बहाएं। वैसे भी करनाल जिला के कई क्षेत्र भूमिगत जल के काफी नीचे चले जाने के कारण डार्क जोन में आ गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए अब तो पानी बचाना ही पड़ेगा, अन्यथा दूसरे जिलों की तरह करनाल के लोगों को भी फ्रैश वाटर की जगह नैहरी पानी आधारित पेयजल परियोजनाओं से पानी नसीब होगा। इसलिए जल संरक्षण के लिए सभी नागरिक अपना सहयोग दें।
बॉक्स- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को जल संचय की दिलाई शपथ, इसके महत्व को लेकर बच्चों और स्टाफ को किया जागरूक।
जल बचाने की मुहिम को लेकर नगर निगम की टीम शिक्षण संस्थाओं में जाकर विद्यार्थियों को जागरूक करने में लगी है। गुरूवार को टीम में शामिल अधिकारी व कर्मचारियों ने शहर के राम नगर व प्रेम नगर क्षेत्र का दौरा कर वहां के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को जल के महत्व और इसका संचय कैसे किया जाना है, इस बारे विस्तार से और कई उदहारण देकर समझाया।
टीम में शामिल ट्रीगर मास्टर गुरदेव ने विद्यार्थियों को बताया कि मनुष्य अपनी दिनचर्या में प्रतिदिन हाथ धोना, ब्रश करना, बर्तन व कपड़े धोना तथा छोटे व बड़े वाहन को धोने का काम करते हैं, जिसमें अनावश्यक रूप से बहुमूल्य जल वेस्ट होता है। अर्थात इन आदतों के लिए जितने जल की आवश्यकता होती है, उससे कई ज्यादा बेकार कर बैठते हैं। लेकिन यदि थोड़ी सी भी सावधानी रखी जाए, तो हजारों लीटर पानी को बचाया जा सकता है। गुरदेव ने विद्यार्थियों से कहा कि पानी को बचाने के अनेक तरीके हैं। कोई व्यक्ति या परिवार अपने घर में भी उपलब्ध जगह के अनुसार रेन वाटर को हार्वेस्ट कर सकता है। सरकारी कार्यालयों के लिए तो ऐसा करना अनिवार्य कर दिया गया है। अब तो ऐसा महसूस किया जा रहा है कि हर गली, मोहल्ला तथा खेत खलिहान में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होने चाहिएं। क्योंकि बारिश के बाद जब पानी आसमान से जमीन पर गिरता है, वे इधर-उधर फैलकर जमीन में समा जाता है, लेकिन वह भूमिगत जल स्तर तक नहीं पहुंच पाता। परिणामस्वरूप बारिश में आया विशाल जल रिचार्ज नहीं हो पाता।
उन्होंने विद्यार्थियों को जल संचय की भी शपथ दिलाई। विद्यार्थियों ने शपथ ली कि, मैं स्वच्छता के साथ-साथ जल संचय के लिए प्रति सजग रहूॅंगा और उसके लिए सयम दूंगा। मैं लोगों को जागरूक करके स्वच्छता व जल संचय के संकल्प को चरितार्थ करूॅंगा। मैं न जल को व्यर्थ बहाउंगा, न किसी ओर को बहाने दूंगा। सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मोहल्ले से, मेरे गांव से एवं मेरे कार्य स्थल से जल संचय की शुरूआत करूंगा। मेरा मानना है कि आज हम जल बचाकर भविष्य को बचाने में अपना सहयोग करेंगे।
आज के शपथ कार्यक्रम में कार्यकारी अभियंता अक्षय कुमार, सहायक अभियंता सुनील भल्ला, कनिष्ठ अभियंता राम निवास, निगम की मोटीवेटर टीम तथा विद्यालय की तरफ से प्रिंसीपल रणधीर सिंह व उनका स्टाफ मौजूद रहा।
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