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अभियुक्तों को मादक पदार्थ रखने का दोषी करार देते हुए कठोर कारावास एवं जुर्माना की सजा सुनाई

कैथल, 6 सितम्बर: जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एम.एम.धोंचक ने बतौर विशेष न्यायाधीश नार्काेटिक ड्रग्स एंड साईकोट्रोपिक सबस्टैंसिज अधिनियम 1985 की धारा 21 के तहत दो मामलों में अभियुक्तों को मादक पदार्थ रखने का दोषी करार देते हुए कठोर कारावास एवं जुर्माना की सजा सुनाई।
श्री एम.एम. धोंचक ने प्रथम मामले में जिला के पाडला गांव निवासी सुनील उर्फ शीला पुत्र जगतू राम को 700 ग्राम गांजा पत्ते रखने का दोषी करार देते हुए 16 माह के कठोर कारावास एवं 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी व्यक्ति को 2 माह की अतिरिक्त सामान्य कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय द्वारा इस मामले का मात्र 29 दिनों में फैसला सुना दिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार अभियुक्त को पुलिस द्वारा 16 अप्रैल 2019 को पकड़ा गया था तथा व्यक्तिगत तलाशी के दौरान उससे उपरोक्त मात्रा में गांजा पत्ते बरामद किए गए थे। पुलिस द्वारा स्थानीय सदर पुलिस थाना में नार्काेटिक ड्रग्स एंड साईकोट्रोपिक सबस्टैंसिज अधिनियम 1985 की धारा 20 के तहत गत 16 अप्रैल 2019 को मामला दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा गत 6 अगस्त 2019 को न्यायालय में चालान पेश किया गया था दोषी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा 8 अगस्त 2019 को चार्जशीट किया गया। मामले की पैरवी के दौरान प्रोसीक्यूशन द्वारा 21 प्रमाणिक दस्तावेज एवं 11 गवाह पेश किए गए।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एम.एम. धोंचक ने इसी अधिनियम के दूसरे मामले में जिला के गांव पाई निवासी मेनकुमार पुत्र राजेंद्र कुमार को 6 ग्राम 10 मिलिग्राम स्मैक रखने का दोषी करार देते हुए 15 माह के कठोर कारावास एवं 20 हजार रूपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति दोषी व्याक्ति को 2 माह की अतिरिक्त सामान्य कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय द्वारा इस मामले का मात्र 20 दिनों में फैसला सुना दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार अभियुक्त को पुलिस द्वारा 2 फरवरी 2019 को पकड़ा गया था तथा व्यक्तिगत तलाशी के दौरान उससे उपरोक्त मात्रा में स्मैक बरामद की गई थी। पुलिस द्वारा पूंडरी पुलिस थाना मेें नार्काेटिक ड्रग्स एंड साईकोट्रोपिक सबस्टैंसिज अधिनियम 1985 की धारा 21 के तहत गत 2 फरवरी 2019 को मामला दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा गत 16 अगस्त 2019 को न्यायालय में चालान पेश किया गया था तथा दोषी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा 19 अगस्त 2019 को चार्जशीट किया गया। मामले की पैरवी के दौरान प्रोसीक्यूशन द्वारा 18 प्रमाणिक दस्तावेज एवं 9 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष द्वारा 2 प्रमाणिक दस्तावेज पेश किए गए।

न्यायाधीश ने उपरोक्त फैसले सुनाते हुए कहा कि आज विश्व का कोई भी हिस्सा मादक पदार्थों की तस्करी एवं मादक पदार्थों की लत के अभिशाप से अछूता नहीं रह गया है। दुर्भाग्य से हमारा देश भी मादक पदार्थों की तस्कारी के जाल में फंस चुका है तथा मादक पदार्थों की लत से ग्रसित लोगों की संख्या तेज गति से बढ रही है। संयुक्त राष्टï्र की एक रिर्पोट के अनुसार भारत में लगभग 10 लाख लोग मादक पदार्थों की लत से ग्रसित हैं। इन मामलों की पैरवी पब्लिक प्रोसिक्यूटर जनक राज ने की।

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