करनाल 11 जनवरी, करनाल स्मार्ट सिटी को लेकर पिछले दिनो प्रोजेक्ट मेनेजमैंट कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद इसके दोनो भाग एरिया बेस्ट डव्लपमेंट व पेन सिटी के तहत क्या-क्या कार्य होने हैं, उनसे पहले शहर की जनता के सामने कुछ ऐसे प्रोजेक्ट्स शुरू किए जाएं, जिनसे उन्हे आबास हो कि स्मार्ट सिटी में कुछ हो रहा है। इसी को लेकर शुक्रवार को विकास सदन के सभागार में मण्डल आयुक्त विनीत गर्ग की अध्यक्षता में एडवाईज़री कमेटी की मीटिंग की गई, जिसमें प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा कैसे और किस जगह पर होगा, कितना पैसा खर्च होगा तथा नागरिको को उससे क्या सुविधाएं प्राप्त होंगी, इस पर काफी देर तक विचार-विमर्श और सुझावों के साथ मंथन हुआ। बैठक में नगर निगम की नवनिर्वाचित मेयर रेणु बाला गुप्ता, उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया, निगम आयुक्त राजीव मेहता, उप निगमायुक्त धीरज कुमार के अतिरिक्त के.पी.एम.जी. के प्रोजेक्ट मेनजर, अर्बन प्लानर, एसोसिएट कंसल्टेंट, एसोसिएट डायरेक्टर, जिला परियोजना समन्वयकसपना जैन, भाजपा नेता अशोक सुखीजा, आर.एस.ए. शुभम भारद्वाज तथा एडवाईज़री कमेटी में शामिल शहर के अंजू धवन, मिनाक्षी भिण्डर, ओमनाथ, पंकज अनेजा, जयपाल, जसपाल वर्मा, नरेश सलुजा तथा डॉ. वी.के. सहगल भी शामिल हुए।
मण्डल आयुक्त ने कहा कि स्मार्ट सिटी का मतलब स्मार्ट विकास भले ही हो, लेकिन ऐसे कार्य होने चाहिए, जिनसे शहर की जनता को सुविधा मिले। वर्तमान में शहर में ट्रैफिक कंट्रोल, पेयजल की वेस्टेज व पावर का लोस, बिजली की तारो के जाल तथा उनसे जुड़े खम्बे व ट्रांसफार्मर जैसी समस्याएं हैं। लोगो को यह सभी सुविधाएं सुरक्षित तरीके से उपलब्ध हों, स्मार्ट सिटी में जितना भी विकास किया जाए, उससे इनकम जेनरेट भी होनी चाहिए। इसी प्रकार शहर में जितने भी चौक हैं, उनको स्मार्ट बनाएं, लेकिन वहां लगे प्रतिमाएं और मूल स्वरूप को क्षति ना हो। कमांड एंड कंट्रोल एरिया ऐसा हो, जिसमें सी.सी.टी.वी. कैमरो की कार्यप्रणाली समूचित रूप से बनी रहे।
उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने प्रोजेक्ट्स पर चर्चा के दौरान कुछ उपयोगी सुझाव दिए, कहा कि कल्पना चावला राजकीय मैडिकल कॉलेज रोड पर पुरानी कचहरी और इसके साथ लगती पुरानी पुलिस लाईन के कुछ हिस्से को पार्किंग के रूप में विकसित किया जा सकता है, यहां वैंडर्स के लिए भी स्थान बनाए जा सकते हैं। उन्होने यह भी बताया कि शहर के कुंजपुरा रोड व अम्बेडकर चौक पर डिस्मेंटल हो चुके सिनेमा घरो की जगह को भी नगर निगम एक्वायर कर पार्किंग विकसित कर सकता है। इसी प्रकार मुख्य डाकघर के पास स्थित केन्द्रीय मैडिकल स्टोर को भी अनियत्र स्थापित कर यहां एक अच्छी पार्किंग विकसित की जा सकती है। उन्होने चर्चा के दौरान कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया जाना है, उसे प्रदेश सरकार के स्तर पर आगामी 15 जनवरी को होने वाली बैठक में अप्रवूल के बाद जल्दी शुरू कर लें।
प्रोजेक्ट्स जिन पर चर्चा हुई– बैठक में निगमायुक्त ने बताया कि स्मार्ट सिटी में कुल 58 प्रोजेक्ट होंगे, जिनमें 41 ए.बी.डी. अर्थात क्षेत्र आधारित विकास के तथा 7 पैन सिटी से सम्बंधित होंगे। इन सब पर 1200 करोड़ रूपये खर्च होंगे। यह पैसा भारत सरकार, राज्य सरकार व पी.पी.पी. मोड से खर्च किया जाएगा। उन्होने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए 720 एकड़ क्षेत्र में जिन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू होना है, उनमें मुगल कैनाल फेस-2 में कॉमर्शियल स्पेस के कार्य, पुराने नगर निगम कार्यालय स्थल पर कॉमर्शियल पार्किंग व स्पेस, लैंड स्केपिंग के कार्यों में ग्रीन स्पेसिंग व नेकी की दीवार को स्मार्ट स्थल के रूप में विकसित करना, स्मार्ट क्लास रूम व चौको का विकास तथा मल्टी इंटाग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करना है। उन्होने बताया कि नगर निगम की पुरानी बिल्डिंग के कार्य तथा मुगल कैनाल फेज़-2 के कार्यों के डिजाईन अप्रूव हो गए हैं। उन्होने बताया कि शहर के विभिन्न चौको की ब्यूटिफिकेशन तथा कर्ण गेट मार्किट क्षेत्र को हैरीटैज के रूप में विकसित किया जाएगा, जो व्हीकल फ्री होगा। स्मार्ट सिटी में जो भी स्मार्ट फीचर आएंगे, उसमें ध्यान रखा जाएगा कि किसी का भी बिजनेस प्रभावित ना हो। उन्होने बताया कि नेकी की दीवार स्थल पर स्मार्ट फीचर होंगे, जिनमें बॉक्स, कपड़े टांगने के लिए प्रावधान, जरूरी नम्बर, बैठने की जगह, सोलर सिस्टम तथा इनके पीछे दानवीर कर्ण की पेंटिंग होगी। उन्होने बताया कि शहर में बिजली की तारो को अंडरग्राउण्ड करने के लिए बिजली विभाग का 200 करोड़ रूपये का प्रोजेक्ट है।
एडवाईज़री कमेटी की ओर से यह सुझाव आए- भाजपा नेता अशोक सुखीजा ने कई अच्छे सुझाव दिए। कहा कि, एक स्मार्ट स्कूल बनाए जाने से पहले एक स्मार्ट क्लास बना लेनी चाहिए, स्मार्ट क्लास में जो भी सिस्टम लगेगा, उसके संचालन के लिए अध्यापको को अच्छे से प्रशिक्षण दिया जाए। शहर की जिन सडक़ो को स्मार्ट रोड़ बनाया जाना है, वहां ट्रैफिक कंट्रोल की समूचित व्यवस्था हो। प्रोजेक्ट के तहत चुने गए डॉ. भीमराव अम्बेडकर चौक, महात्मा गांधी चौक, भगवान परशुराम चौक, महर्षि वाल्मिकी चौक के मूल स्वरूप को रखते हुए इनका सौदण्र्यकरण किया जाए। कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के लिए बिछाई जाने वाली ऑपटिकल फाईबर का कार्य कम्प्रीएंसिव तरीके से हो, जिसमें बिजली, संचार कम्पनियों की तारें, सभी का प्रावधान हो, ताकि एक बार जगह की खुदाई के बाद उसे दोबारा ना खोदा जाए अर्थात सभी कार्य भविष्य की सम्भावनाओं के आधार पर किए जाएं। उन्होने यह भी सुझाव दिया कि शहर के नमस्ते चौक व मीरा घाटी चौक का सौदण्र्यकरण कर इसे स्मार्ट बनाया जाए। कुछ सदस्यो ने शहर में सडक़ो पर भटकते पशु व कुत्तो की समस्या से निपटने के लिए कोई माकुल योजना बनाने का सुझाव दिया।
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