कुरुक्षेत्र, 31 जुलाई। कुरुक्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी स्व. मेहर चंद मेहंदीरत्ता की 30वीं पुण्यतिथि पर उनकी पावन स्मृति में कुरुक्षेत्र के कीर्ति नगर में स्व. मेहर चंद मेहंदीरत्ता चैरिटेबल डिस्पेंसरी एवं लाइबे्ररी में 2 अगस्त को 10वां रक्तदान शिविर, निशुल्क चिकित्सा शिविर जिसमें कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. पवन बंसल बी एस हार्ट अस्पताल के सहयोग से निशुल्क दवाईयॉं भी वितरित की जाएंगी वहीं जरूरतमंद बच्चों को पाठ्य सामग्री भी बांटी जाएगी। कार्यक्रम में अंबाला डिवीजन की आयुक्त श्रीमती दीप्ती उमाशंकर मुख्यातिथि होंगी, जबकि कुरुक्षेत्र के उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया व श्री सुरेन्द्र पाल ङ्क्षसह पुलिस अधिक्षक एचएपी मधुबन अति विशिष्ट अतिथि होंगेे। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. सतीश कुमार निदेशक एन.आई.टी., डॉ. बलदेव कुमार कुलपति आयुष विश्वविद्यालय, रादौर के एस.डी.एम. कंवर सिंह, कुवि की कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, एनआईटी के कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र देसवाल विशिष्ट अतिथि होंगे। हृदय रोगों की जांच, कॉलेस्ट्राल की जांच, कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. पवन बंसल की टीम के द्वारा नि:शुल्क किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम में मीडिया जगत की जानीमानी हस्तियां भी शिरकत करेंगी। इसके अलावा नगर की जानीमानी समाजसेवी, धार्मिक संस्थाएं व अनेक गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
गौरतलब है कि स्व. मेहर चंद मेहंदीरत्ता के प्रयासों से ही 1950 के दशक में अखबार जिला कुरुक्षेत्र में आना शुरू हुआ था। उस जमाने में जब संसाधनों की कमी थी व अखबार के आने का कोई समय नहीं होता था और गिनी चुनी अखबारें ही आती थी। तब भी वे शहर से 25-25 किलोमीटर दूर तक अखबार भिजवाने की व्यवस्था करते थे। कुरुक्षेत्र में मियांवाली बिरादरी को इक_ा करने का श्रेय भी इन्हें जाता है। यही नहीं उन्होंने अपने जीवनकाल में सैकड़ों गरीब कन्याओं का विवाह करवाया। जरूरतमंद को कापी, किताब मुफ्त देना मानो उनका शौक था। स्व. मेहर चंद मेहंदीरत्ता का सपना था कि समाज के लिए कुछ ऐसा किया जाए जिससे समाज को फायदा हो। इस कड़ी में उन्होंने कुरुक्षेत्र के कीर्तिनगर में एक जगह ली थी जहां पर आज सुचारू रूप से डिस्पैंसरी एवं लाइबे्ररी निरंतर 7 साल से चल रही है। वर्ष 1989 में मेहर चंद मेहंदीरत्ता को दिल का दौरा पडऩे के कारण उनका निधन हो गया व उनका यह सपना तब साकार नहीं हो सका, उस सपने को साकार करने का प्रयास उनके पुत्रों ने किया है। उनके सभी बच्चे मीडिया से जुड़े हुए हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र राजीव अरोड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि डिस्पेंसरी में किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता और दवाइयां भी मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाती हैं। रोजाना सोमवार से लेकर शनिवार तक तीन घंटे डॉक्टर उपलब्ध रहता है और रविवार को महिला डॉक्टर भी बैठती है। पंकज अरोड़ा ने बताया कि वह अपने पिता जी के सपने साकार करने के लिए भविष्य में और भी समाज हित में कार्य करेंगे और इसकी योजना बनाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि चैरिटेबल डिस्पेंसरी एवं लाइबे्ररी का शुभारंभ 3 अगस्त 2012 को किया गया, जिसमें 7 वर्ष के अंतराल में 1 लाख से अधिक जरूरतमंद लोगों की चिकित्सीय जांच की गई व उन्हें निशुल्क दवाईयां उपलब्ध करवाई गई। जिला रेड क्रॉस की सहायता से अब तक 9 रक्तदान शिविर लगाकर 2000 से भी अधिक यूनिट ब्लड इक्ठ्ठा कर लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल में दान करवाया गया।
इस 7 वर्ष के दौरान आंखों के मेडिकल कैंप, दंत चिकित्सा कैंप, हड्डी रोग जांच कैंप, जरूरतमंद लोगों को वॉकर व छड़ी उपलब्ध करवाना एवं जरूरतमंद बच्चों को वर्दियां, जूते, कॉपी-किताब भी उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने बताया कि संस्था का सारा खर्चा परिवार वहन करता है। संस्था द्वारा आज तक कभी भी सरकारी या गैर सरकारी वित्तीय सहायता नहीं ली गई है।
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