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गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव पर हरियाणा सरकार द्वारा आगामी 4 अगस्त को सिरसा में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा

कैथल, 18 जुलाई: गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव पर हरियाणा सरकार द्वारा आगामी 4 अगस्त को सिरसा में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। आने वाली पीढ़ी को महापुरूषों के बारे में अवगत करवाने के लिए सरकारी स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। राज्य स्तरीय कार्यक्रम को लेकर जिला के श्रद्धालुओं में उत्साह है। भारी संख्या में श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।

उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाना सराहनीय कदम है। जिला में इस कार्यक्रम के लिए उपमंडलाधीश कैथल जगदीप सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। बाबा बंदा सिंह बहादुर सम्प्रदाय के राष्ट्रीय संयोजक शिव शंकर पाहवा ने बताया कि गुरू और महापुरूषों के प्रकाश उत्सव को आयोजित करके हरियाणा सरकार सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव जी के सिंद्धात आज भी प्रसांगिक है। वर्तमान सरकार द्वारा गुरूओं के बलिदान और गौरव गाथा को आने वाली पीढि़यों तक पहुंचानें का कार्य किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी महापुरूषों के दिखाए हुए मार्ग पर चलकर एक सभ्य समाज की स्थापना कर सके। जिला कैथल भी गुरूओं की इतिहास गौरव गाथा का हिस्सा रहा है। यहां भी नीम साहिब गुरूद्वारा, गुरूद्वारा मंजी साहिब, सेवा पंथी आश्रम टोपियों वाला गुरूद्वारा, गुरूद्वारा 6वीं ते 9वीं पातशाही चीका में सिख कौम के इतिहास का उल्लेख मिलता है।

यह है जिला कैथल स्थित विभिन्न गुरूद्वारों का स्वर्णीम इतिहास

गुरूद्वारा 6वीं ते 9वीं पातशाही चीका

शहीदी यात्रा के 11वें पड़ाव में गुरू तेगबहादुर साहिब जी के चरणों की छौह जिला कैथल के चीका ने प्राप्त की। यह नगर पटियाला और कैथल के मध्य में स्थित है। श्री गुरू तेगबहादुर जी यहां भाई गलौरा के निवास स्थान पर ठहरे तो जोकि हांसी व हिसार का मसंद था। इस स्थान को गुरू साहिबानों की चरणों की छौह प्राप्त है, श्री हरिगोबिंद साहिब जी और श्री गुरू तेगबहादुर साहिब जी। इस पवित्र स्थान पर श्री गुरू हरगोबिंद साहिब जी और श्री गुरू तेगबहादुर जी की याद में गुरूद्वारा 6वीं व 9वीं पातशाही सुशोभित है जोकि गांव के उत्तरपूर्वी भाग में स्थित है। गुरू साहिब ने यहां संतों के साथ जो बचन किए वह भी गुरूद्वारा के इतिहास में दर्ज है।

कैथल का नीम साहिब गुरूद्वारा

सिखों के नवम गुरू श्री गुरूतेग बहादुर जी ने शहीदी यात्रा आनन्दपुर साहिब से शुरू की थी और विभिन्न पड़ावों से होते हुए उनका 12वां पड़ाव कैथल की धरा पर हुआ था और गुरू तेगबहादुर जी के चरण यहां पडे़ थे। आनंदपुर से चलकर रोपड़ के कीरतपुर साहिब गांव भरतगढ़, किला सैफाबाद पटियाला, गांव बहादुरगढ़ साहिब, गांव रायपुर, गांव लहल, मोतीबाग, सामाना, जिला कैथल के गांव गढ़ी नजीर, गांव कराली तथा चीका में 11वें पड़ाव के बाद नौंवे गुरू तेगबहादुर जी के मुबारक कदम कैथल की भूमि पर पडे़ थे। गुरू तेगबहादुर ने कार्तिक वदी 7 संवत 1723 सांय को कैथल ठण्डार तीर्थ पर प्रवेश किया। गुरू जी तरखाण सिख भाई मल्हे से पूछा कि हमे कैथल जाना है और वहां कोई गुरू का पे्रमी है तो मल्हे ने कहा कि कैथल में दो घर बनिए के और एक घर तरखाण सिख का है जो गुरू के पे्रमी हैं। गुरू जी भाई मल्हे को साथ लेकर कैथल की ओर चल पडे़। कैथल के नजदीक पहुंचकर मल्हे ने पूछा, पहले किस के घर चलना है तो हुक्म हुआ जिसका घर नजदीक हो। पहले जुगल तरखाण के घर पहुंचे जहां गुरू सेवक ने बहुत सम्मान किया और यथा शक्ति सेवा की। अमृत वेले गुरू जी ठण्डार तीर्थ पर स्नान करके नीम के नीचे बैठकर प्रभू सिमरन कर रहे थे तब गुरू जी का आना सुनकर शहर की संगते एकत्र हुई जिनमें से एक बुखार से पीडि़त था। गुरू जी ने इसी नीम के पत्ते खिलाकर रोगी का ताप दूर किया। इसी नीम का नाम नीमसाहिब हुआ। इसी स्थान पर नौंवी पातशाही नीम साहिब गुरूद्वारा स्थित है, जहां सुबह-सांय श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पाठ और गुरवाणी से गुरू पे्रमियों को आनन्दित किया जाता है।

गुरूद्वारा मंजी साहिब पातशाही नौंवी सेठां मोहल्ला कैथल

श्री गुरूतेग बहादुर जी ने शहीदी यात्रा के दौरान कैथल प्रवास में 13वें पड़ाव में जहां कदम डाले वह पट्टी कैथ सेठ है, जिसको मोहल्ला सेठां के नाम से जाना जाता है। यह स्थान शहर के अंदर है। संगत के कहने पर गुरू तेगबहादुर जी दोपहर का भोजन करने के लिए मोहल्ला सेठांन में आए और भाई जुगल तरखान सिख के घर बिराजे जहां आज ये स्थान सुशोभित है। गुरू साहिब के वहां ठहरने के कारण उस घर को गुरूद्वारा समझा जाने लगा। कैथल रियासत के दूसरे शासक भाई लाल सिंह ने इस स्थान पर एक मंजी स्थापित की। अब यहां गुरू साहिब की पवित्र स्मृति में गुरूद्वारा मंजी साहिब पादशाही नौंवी के नाम से जाना जाता है। इस गुरूद्वारे को बड़ा नौवीं पातशाही के नाम भी जाना जाता है।

कैथल स्थित सेवा पंथी आश्रम टोपियों वाला गुरूद्वारा

कैथल शहर के बीचों-बीच स्थित सेवा पंथी आश्रम में भी सुबह-सांय श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पाठ होता है। यह गुरूद्वारा सिखों के प्रथम गुरू नानक देव जी महाराज के परम शिष्य एवं परम सेवक भाई कन्हैया के वंशजों द्वारा चलाया जा रहा है। यहां मंहत हरीश जी शास्त्री गद्दीनशीन है, जिनकी अगुवाई में मंहत आशीष व मंहत बलदेव सहित अन्य सेवकों द्वारा भी गुरमत प्रचार नित नियम से होता है और हर वर्ष भाई कन्हैया की गुरू नानक देव जी महाराज के लिए तथा दीन दुखियों के लिए दी गई निष्काम सेवाओं को समर्पित तीन दिवसीय समागम भी रहता है। इसमें देश व प्रदेश के विभिन्न गुरूद्वारों से ग्रंथी भाग लेकर श्री गुरू नानक देव जी महाराज व सिखों के दस गुरूओं की महिमा का बखान करते हैं।

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