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जगतार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 व 502 तथा प्रोटैञ्चशन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सैञ्चसुअल ऑफेंसिज एञ्चट 2012 की धारा 6 के तहत यौन शोषण का दोषी करार दिया

कैथल, 1 मई: अतिरिञ्चत जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री हुकम सिंह के न्यायालय ने जगतार सिंह पुत्र किशन सिंह को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 व 502 तथा प्रोटैञ्चशन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सैञ्चसुअल ऑफेंसिज एञ्चट 2012 की धारा 6 के तहत यौन शोषण का दोषी करार दिया। न्यायालय द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) (आई) के तहत दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कठोर कारावास तथा 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। इसके अतिरिञ्चत पीडि़ता के पुनर्वास के लिए जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की सचिव को मुआवजा तय करने की हिदायतें जारी की गई हैं।

कैथल महिला पुलिस थाना में शिकायतकर्ता द्वारा अभियुञ्चत जगतार सिंह के खिलाफ स्वयं की बेटी का यौन शोषण करने की शिकायत दर्ज करवाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार दोषी की पत्नी ने अभियुञ्चत जगतार सिंह के साथ 2009 में अपनी शादी को समाप्त करते हुए दूसरी शादी कर ली थी तथा एक लडक़ा व एक लडक़ी दोनो बच्चे अपने पिता के पास ही रह रहे थे। शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि लडक़ी की दादी व भाई की अनुपस्थिति में अभियुञ्चत जगतार ङ्क्षसह ने 6-7 महीने उसका यौन शोषण किया था और इस संदर्भ में किसी को जानकारी देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार 28 जनवरी 2018 को दंड प्रक्रिया नियमावली 1973 की धारा 164 के तहत पीडि़त लडक़ी के बयान दर्ज किए गए थे तथा 30 जनवरी 2018 को महिला अधिवञ्चता द्वारा लडक़ी की काउंसलिंग भी की गई थी। प्रोसीञ्चयूसन द्वारा इस मामले में 13 प्रमाणिक दस्तावेज एवं 15 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष द्वारा 7 प्रमाणिक दस्तावेज एवं 2 गवाह पेश किए गए। अतिरिञ्चत जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले में यह टिप्पणी की गई कि अपनी लडक़ी की देखभाल करने और उसकी सुरक्षा करने की बजाय एक पिता द्वारा स्वयं की लडक़ी के जीवन को बर्बाद किया गया है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में सक्चत से सक्चत सजा देना अनिवार्य है, जिसे मद्देनजर रखते हुए दोषी को आजीवन कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना की कठोर सजा सुनाई गई।

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