कैथल 22 अगस्त: हरियाणा किसान आयोग के सदस्य डॉ. आर.एस. बाल्यान ने जिला के किसानों का आह्वïान किया कि वे जैविक खेती व फसलों का विविधिकरण को अपनाएं एवं खेती में मशीनीकरण को बढावा दें ताकि खेती की लागत को कम करके आमदनी को बढाया जा सके। किसान भूमि, पर्यावरण एवं जल संरक्षण हेतू भी अपना पूर्ण सहयोग दें। किसान फसलों के अवशेषों को आग न लगाकर इन्हें भूमि में मिलाएं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढेगी। उन्होंने किसानों को भूमि व जल का संरक्षण करने, जैविक खेती एवं फसलों का विविधिकरण अपनाने की शपथ भी दिलवाई।
डॉ. आर.एस. बाल्यान स्थानीय हनुमान वाटिका स्थित हॉल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा कृषि प्रोद्यौगिकी प्रबंधन अभिकरण (आतमा) के तहत आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय किसान मेला में उपस्थित किसानों को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टï कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, हरियाण के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल तथा प्रदेश के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ किसानों की आय बढाने के लिए पर्यासरत हैं। उन्होंने कहा कि किसान वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप खेती करें तथा खेती में मशीनों के प्रयोग को बढावा दें ताकि मजदूरी की लागत कम होने तथा उत्पादन बढने से इनकी आमदनी में वृद्घि हो।
उन्होंने कहा कि किसान मिलकर अर्थात् समूह बनाकर अपना व्यवसाय करें और अपने उत्पादों की ग्रेडिंग, प्रोसैसिंग एवं मार्केटिंग पर भी ध्यान केंद्रित करें ताकि इनके उत्पाद का पूरा मूल्य उन्हें मिल सके। किसान फल, सब्जी, डलहन, मशरूम आदि उत्पादन को भी अपनाएं। प्रदेश सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन हेतू किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 80 प्रतिशत तक ऐसे कृषि यंत्रों पर अनुदान प्र्रदान कर रही है तथा कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित किए जा रहे हैं। किसान समूह बनाकर ऐसे कृषि यंत्र खरीदते हैं, तो उन्हें कृषि यंत्रों की खरीद पर 80 प्रतिशत अनुदान राशि दी जाती है। व्यक्तिगत रूप से ऐसे कृषि यंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत अनुदान राशि दी जाती है।
डॉ. आर.एस. बाल्यान ने कहा कि किसान फसलों के अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि फसल अवशेष प्रबध्ंान योजना का लाभ उठाकर इन अवशेषों को कृषि यंत्रों की मदद से भूमि में मिलाएं ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ सके। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है, बल्कि भूमि में मौजूद मित्र कीट भी नष्टï होते हैं। उन्होंने कहा कि धान हमारी पारम्परिक फसल नहीं है। हमारे देश में एक किलोग्राम धान उत्पादन के लिए लगभग 3500 से 4000 लीटर पानी की खपत होती है, जबकि इजराईल में इतने ही धान के उत्पादन के लिए केवल 5 से 6 लीटर पानी की खपत होती है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. पवन शर्मा ने मुख्यातिथि तथा किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा वर्षा के जल के संचय के लिए जल शक्ति अभियान शुरू किया गया है। सभी किसान इस अभियान में अपना पूर्ण सहयोग दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुआवजे के लंबित मामलों के निपटारे के लिए संबंधित बीमा कम्पनियां आगामी मंगलवार से एक माह तक स्थानीय लघु सचिवालय स्थित विभाग के कार्यालय में सभी कार्य दिवसों में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि संबंधित किसान इस दौरान अपने मुआवजे के दावों का निपटारा करवा सकते हैं। सरकार के निर्देशानुसार इस योजना के सभी लंबित मुआवजा दावों का शत प्रतिशत निपटारा किया जाएगा। मौके पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के फार्म भी भरवाए गए। उन्होंने डॉ. आर.एस. बाल्यान को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
इस अवसर पर कौल स्थित कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य एवं वरिष्ठï वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह, डॉ. दिनेश शर्मा, पशु पालन विभाग के सर्जन डॉ. गुलशन, एचडीओ डॉ. प्रमोद सहारण, बीएओ डॉ. रामेश्वर श्योकंद, जिला मत्स्य अधिकारी सूर्यकांत, जन स्वास्थ्य विभाग के जिला सलाहकार दीपक कुमार, उद्यान विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने विभाग से संबंधित योजनाओं की पूर्ण जानकारी दी। इस मौके पर प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह, राजेश सहित जिला के अन्य किसान मौजूद रहे।
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