कुरुक्षेत्र 15 दिसम्बर पीतल की मूर्ति में पत्थर की नक्काशी से भगवान श्रीकृष्ण के बचपन से लेकर गीता का संदेश देने तक के अलग-अलग 21स्वरुपों को बखुबी दिखाने का प्रयास किया गया है। इस मूर्ति को अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव-2018 के लिए विशेष तौर पर अलीगढ़ के शिल्पकार दलीप चौरसिया तैयार करके लेकर आए है।
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव में पीतल की इन मूर्तियों को देखने के लिए हर किसी के कदम सहजता से रुक जाते है। शिल्पकार दीपक चौरसिया ने बातचीत करते हुए बताया कि महोत्सव में पिछले कई सालों से आ रहे है और हर बार पर्यटकों के लिए कुछ नया लेकर आते है। इस वर्ष 66किलोग्राम वजन की भगवान श्रीकृष्ण-राधा की विशाल पीतल की मूर्ति तैयार की है। इस मूर्ति के चारों तरफ पीतल का बार्डर बनाया गया है, इस बार्डर पर भगवान श्रीकृष्ण के जेल-कोठरी में जन्म लेने, मामा कंस को मारते हुए, ताडक़ा को मारते हुए, यशोद्घा मां से डंडे से मार खाते हुए सहित महाभारत तक की लीलाओं को दिखाने का अनोखा प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रतिमा की कीमत 98 हजार रुपए रखी गई है। इस प्रतिमा को तैयार करने में एक शिल्पकार को दो महीने का समय लग जाता है और प्रतिमा में लगे पीतल के साथ-साथ पत्थर से मीनाकारी करके सजाया गया भी गया है। इस प्रतिमा के अलावा भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के पीतल से बने रथ के साथ-साथ अलीगढ़ के ताले और अन्य प्रतिमाएं खिलौने और समान तैयार करके लेकर आए है।
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