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फसल बीमा योजना के तहत 2629 किसानों को मिली 4 करोड़ 56 लाख 33 हजार 90 रूपये की मुआवजा राशि: उपायुक्त विनय प्रताप सिंह

करनाल 27 जून: उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिला में फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2018 के दौरान 37 हजार 176 किसान कवर किए गए थे। इस दौरान भारी वर्षा, जलभराव व ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित 15 हजार 474 किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किए थे। कम्पनी द्वारा 12 हजार किसानों का सर्वे किया गया, 3 हजार 474 किसानों ने 72 घंटे की अवधि के बाद अपनी फसल खराबे की सूचना दी। इसके तहत 4 करोड़ 56 लाख 33 हजार 90 रूपये की मुआवजा राशि किसानों को वितरित की गई, जिसमें 2629 मामले निपटाए गए।

उपायुक्त वीरवार को लघु सचिवालय के सभागार में फसल बीमा योजना की कृषि अधिकारियों व बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिला के कुछ ऐसे किसान शेष रह गए हैं जिनकी फसल बरसात के पानी के कारण खराब हो गई थी और उन्हें बैंक द्वारा केन्द्र सरकार के पोर्टल पर गलत आकंड़े इंद्राज करने के कारण मुआवजा नहीं मिला सका। इस पर उपायुक्त ने उप कृषि निदेशक को निर्देश दिए कि कृषि विभाग के महानिदेशक को इस बारे एक पत्र उनकी ओर से लिखवाया जाए ताकि बीमा कंपनी से किसानों को उनका मुआवजा मिल सके।

डीडीए ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों के हित के लिए बनी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ 2018 में करनाल जिला में जिन किसानों की फसल प्राकृतिक आपदा से खराब हो गई थी, उनमें से 4395 किसानों के सम्बंधित बैंक द्वारा सरकार के पोर्टल पर गलत आंकड़े इंद्राज करने से मुआवजा ना मिलने की समस्या के समाधान को लेकर भारत सरकार को दो दिन के लिए पोर्टल चालू करने बारे लिखा जाएगा, ताकि त्रुटि के बाद दुरूस्त किए गए आंकड़े अपलोड करवाए जा सके। उन्होंने बताया कि इस योजना की अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर 1800 180 2217 भी जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि खरीफ 2019 के लिए बीमा करवाने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2019 है। किसान भाई इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

बता दें कि इस समस्या को लेकर किसान लगातार डीडीए कार्यालय के चक्कर लगाकर परेशान थे, जिसके समाधान के लिए यह अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें बीमा कम्पनियों का पक्ष भी सुना गया। उन्होंने बताया कि इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी, बल्कि डाटा फीड करने में मानवीय गलती हुई। इस बारे डाटे को दुरूस्त करने के लिए भारत सरकार से दोबारा पोर्टल खुलवाने के लिए उपायुक्त से अनुरोध किया गया।
बैठक में डीडीए के अतिरिक्त हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के उचानी स्थित विस्तार केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक विजय अरोड़ा, नाबार्ड के डीडीएम अभिमन्यु मलिक, एलडीएम एस.के. सिंघाल, एस.बी.आई. जनरल इंश्योरेंस के जिला समन्वयक अंकुश, जिला सांख्यिकी अधिकारी संगीता मेहता, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अधिकारी सुनील कुमार भी मौजूद रहे।

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