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मेरी चेतना पुस्तक समाज को देगी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

कुरुक्षेत्र 30 जनवरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर समाज में बेटियों को बचाने के लिए एक जागृति लाने का काम कर रहे है कृषि विभाग के कर्मचारी मामचंद मलिक। जी हां इस कर्मचारी ने भारत और राज्य सरकार द्वारा पानीपत में शुरु किए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर मेरी चेतना पुस्तक को लिखने का काम किया। इस पुस्तक के 117 पेजों में 110 कविताएं लिखी गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर की सरकार की नीतियों से प्रभावित कृषि विभाग में कार्यरत मामचंद ने समाज सेवा और समाज के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने का प्रण लिया। इस प्रण को जहन में रखकर समाज सेवा करने का कार्य को अंजाम दिया। मामचंद ने समाज के उस तबके के लोगों को जागरुक करने का काम किया, जिस तबके तक आम अधिकारी सहजता से नहीं पहुंच पाता। इस कर्मचारी ने सबसे पहले कुरुक्षेत्र, अम्बाला, करनाल, यमुनानगर जिले में झुग्गी-झौंपडिय़ों में रहने वाले लोगों की जानकारी प्राप्त करने के लिए आरटआई से सूचनाएं और डाटा एकत्रित किया, इस डाटा के आधार पर कर्मचारी मामचंद अपने खर्चे पर ही इन जिलों में जाकर झुग्गी-झौंपडिय़ों में रहने वाले लोगों से सम्पर्क साधा और जानकारी हासिल की है।

झुग्गी-झौंपडिय़ों के लोगों से मन की बात को सांझा करने पर यह तथ्य सामने आए कि अधिकतर लोगों की राशन कार्ड और आधार कार्ड ही नहीं बने थे। इन लोगों के राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा और उनकी मेहनत रंग लाई और अब तक इन 4 जिलों में झुग्गी-झौंपडिय़ों में रहने वाले 4600 लोगों के आधार कार्ड व राशन कार्ड बनवाने का काम किया है। इतना ही नहीं इस समाज कार्य के साथ-साथ कर्मचारी मामचंद ने सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं अभियान से प्रेरित होकर मेरी चेतना पुस्तक लिखी, इस पुस्तक का विमोचन भी समाज सेवी एवं वरिष्ठï नागरिक गुरबचन कौर से करवाया। इस पुस्तक में 110 कविताए लिखी है जो समाज को बेटियों की अहमियत के बारे में जागरुक करेंगी। इस पुस्तक में 117 पन्ने है।

मामचंद ने अपनी पहली पुस्तक अनोखी सोच लिखी, दूसरी पुस्तक मेरी कलम और तीसरी पुस्तक जागृति को लिखने का काम किया। मामचंद ने इन पुस्तकों में समाज सेवा करने, नशे के दुष्प्रभाव, भ्रष्टïाचार को समाप्त करने जैसे सामाजिक विषयों को अपनी कविताओं की सामग्री बनाने का काम किया। इन प्रयासों को लेकर 3 दिसम्बर 2018 को राज्य सरकार की तरफ से प्रथम पुरस्कार भी दिया गया। इस राज्य अवार्ड को हासिल करेन के बाद मामचंद में सामाजिक मुद्दों पर लिखने का और जज्बा पैदा हो गया है। स्टेट अवार्डी मामचंद का कहना है कि समाज में नन्ही सी जान बेटी, रोटी, नारी की शक्ति एवं भ्रष्टïाचार, घोटाले एवं सामाजिक कुरीतियों के प्रभाव, दबे-कूचले लोगों का दु:ख, शोषित समाज और नशे के दुष्प्रभाव जैसी सामाजिक कूरीतियों को ही अपनी कविताओं का विषय बनाया है, इन विषयों पर लिखना उनका शौक बन गया है और यह प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल की नीतियों से ही मिली है।

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