कुरुक्षेत्र 21 दिसम्बर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के शिल्प मेले में पहुंचें पर्यटक मोहम्मद आरिफ के वूडन वर्क की तरफ आकर्षित हो रहे है। हर कोई लकड़ी पर की गई नक्काशी का मूरीद बन रहा है। सरस मेले में अपने स्टाल पर बातचीत करते हुए मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके बचत घाट सेल्फ हेल्प ग्रुप को डीआरडीए की तरफ से सरस मेले आमंत्रित किया गया है। इनका यह ग्रुप सहारनपुर में करीब 20 आदमियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रहा है। शिल्प मेले में पहुंचने वाले पर्यटक उनकी और आकार्षित हो रहे है और उनके द्वारा लकड़ी के सामान पर की गई कारीगरी की सराहना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बताया कि शीशम, सांगवान तथा आम की लकड़ी की वह विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाते हैं। उनके द्वारा बनाई गई मेज की कीमत 1 लाख रुपए तक होती हैं। इसके साथ-साथ तक लकड़ी के कार्नर, फोटो फ्रेम, गमले, कमशोल, पार्टीशियन, संदूख, शीशे के बड़े फ्रेम, सजावट का समान आदि बनाया जाता हैं। उन्होंने बताया कि इस बार शिल्प मेले में मटका सेट तथा 48 ईंच की तोप भी प्रदर्शित की है जिस पर हाथ के द्वारा नक्काशी की गई हैं। पर्यटकों की मांग पर 6 फुट शीशे का फ्रेम भी बनाया गया हैं, इसके साथ-साथ पीतल की नक्काशी की हुए छोटे व बड़े संदूक शिल्प मेेले में प्रदर्शित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि उनके द्वारा इस समान को बनाने के बाद जो वेस्ट लकड़ी बचती है, उस वेस्ट लकड़ी को भी दोबारा प्रयोग करके आम दिनचर्या में प्रयोग होने वाला समान तैयार किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रुप पैन स्टैंड, की-चैन, वॉल स्टैंड, एक्यूप्रेशर रॉड़, कॉफी सेट टेबल आदि को वेस्ट लकड़ी का प्रयोग करके तैयार किया जाता है। उनके स्टाल पर 20 रुपए से लेकर 55 हजार रुपए तक का लकड़ी का बना समान उपलब्ध है।
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