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विचार गोष्ठी में बताया विक्रमी संवत् का महत्व

कुरुक्षेत्र, 12 अप्रैल। संस्कृत भारती एवं कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद विद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में विक्रमी संवत् पर विचार गोष्ठी ब्रह्मसरोवर स्थित पाठशाला में आयोजित की गई। जानकारी देते हुए आचार्य नरेश कौशिक ने बताया कि कार्यक्रम में संस्कृत अकादमी पंचकूला के निदेशक डा. सोमेश्वर दत्त ने बतौर मुख्य अतिथि दीप प्रज्ज्वलित किया, जबकि अध्यक्षता डा. सुरेंद्र मोहन मिश्र ने की। अपने संबोधन में डा. मिश्र ने भारतीय काल गणना के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं पर्वों का भी महत्व बताया। विख्यात भागवत आचार्य शुकदेव ने एक पौरा‌णिक कथा के माध्यम से वर्ष प्रतिपदा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण विक्रमी संवत् से ही आरंभ किया। भारतवर्ष में प्रचलित सभी संवत्सरों का प्रथम दिन विक्रमी संवत् से ही आरंभ होती है। धर्मराज यु‌धिष्ठिर का राजतिलक एवं संत झूलेलाल जी का जन्मदिवस पर इसी दिन हुआ था। इस मौके पर पाठशाला के ब्रह्चारियों ने मंत्रोच्चारण, गीत एवं श्लोकों की सुंदर प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्घार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा एडवोकेट, हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास के प्रदेशाध्यक्ष पवन शर्मा पहलवान और कुुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदनमोहन छाबड़ा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के डा. रामनिवास शर्मा, हरिदेव शास्त्री, डीएवी कालेज ‌पिहोवा के प्राचार्य डा. कामदेव झा, डा. पंकज शर्मा, रमेश शास्त्री और पंकज शास्त्री इत्यादि शामिल रहे।

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