Breaking News
Home / Events / वीर विक्रमाजीत में दिखी नारी की महता, सम्पन्न हुआ सांग उत्सव का दूसरा दिन

वीर विक्रमाजीत में दिखी नारी की महता, सम्पन्न हुआ सांग उत्सव का दूसरा दिन

हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के संयुक्त
तत्वावधान में चल रहे सांग उत्सव के दूसरे दिन करनाल के प्रसिद्ध सांगी विष्णु पहलवान द्वारा पंडित मांगेराम का लिखा सांग वीर विक्रमाजीत प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अध्यक्ष कृष्ण पांचाल बतौर मुख्यअतिथि उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा कला परिषद् के उपाध्यक्ष संजय भसीन ने की। इस मौके पर मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा, रोहतक मण्डल के क्षेत्रीय निदेशक गजेंद्र फौगाट व महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी नीना कपूर भी उपस्थित रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। सांग से पूर्व मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेद्र शर्मा ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंटकर किया। वहीं मंच से स्वागत करते हुए सांग उत्सव की रुपरेखा भी अतिथियों से सांझा की तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के सहयोग के लिए एनसीजेडसीसी का धन्यवाद किया। मंच का संचालन विकास शर्मा ने किया। सांग मंचन के दौरान सिमरन पांचाल ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता सुनाकर माहौल में जोश भर दिया। इसके बाद सांग वीर विक्रमाजीत में दिखाया गया कि राजा विक्रमाजीत उज्जैन में राज कर रहे हैं और उनके राज्य में देवलोक से परमहंस पहुंच जाते हैं। विक्रमाजीत के पूछने पर परमहंस बताते हैं कि उनकी हंसनी को इंद्रदेव ने कैद कर लिया है और उन्हें 12 वर्षों के लिए देवलोक से निकाल दिया है। वीर विक्रमाजीत हंसों की पीड़ा से दुखी हो जाते हैं और हंसों की हंसनी को इंद्र की कैद से छुडाने के लिए निकल पड़ते हैं। जहां उनकी मुलाकात रानी रत्नकौर से होती है। रानी रत्नकौर, जो एक गम्भीर बिमारी से ग्रस्त होती हैं। रानी रत्नकौर के पिता ऐलान करवाते हैं कि जो भी व्यक्ति रत्नकौर की बिमारी को दूर करेगा, उसके साथ रत्नकौर का विवाह कर दिया जाएगा। राजा विक्रमाजीत रानी रत्नकौर की बिमारी का इलाज ढूंढ लेते हैं और उसे बिमारीमुक्त कर देते हैं। ऐसे में रानी रत्नकौर राजा से विवाह कर लेती है और राजा के साथ हंसनी को ढूंढने निकल पड़ती है। मार्ग में राजा एक शहर में पहुंचते हैं जहां एक राजपूत की लड़की खाण्डेराव रहती है। खाण्डेराव राजा विक्रमाजीत पर आसक्त हो जाती है। और अपने पिता द्वारा रखी हुई शर्तों को राजा के सामने रखती हैं। रत्नकौर राजा को शर्तें मानने से मना करती हैं, किंतु खाण्डेराव की स्थिति को देखकर विक्रमाजीत को सभी शर्ते मानते हुए खाण्डेराव से विवाह करने के लिए कहती हैं। राजा खाण्डेराव के पिता की शर्तें मान लेता है और खाण्डेराव से विवाह कर लेता है। राजा विक्रमाजीत दोनों रानियों को उज्जैन जाने के लिए कहते हैं और स्वयं हंसनी ढूंढने के लिए जाना चाहते हैं। लेकिन दोनों रानियां राजपाट को छोड़कर राजा की हंसनी को ढूंढने में मदद करती हैं। इस प्रकार राजा दोनों रानियों को लेकर हंसनी को इंद्र की कैद से छुड़ा लाता है। सांग में हरियाणवी संस्कृति की झलक दिखाते हुए कलाकारों ने नारी की महता को दिखाया। सांग मंचन के बाद मुख्यअतिथि कृष्ण पांचाल ने सभी को सम्बोंधित करते हुए कहा कि कलाकार सदैव प्रदेश की संस्कृति को उंचा उठाने में पुरजोर मेहनत करते हैं। कला के संरक्षण एवं संर्वधन के लिए हरियाणावासियों को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए तथा लोक कलाकारों को सहयोग देते हुए आने वाली पीढ़ी के लिए प्राचीन संस्कृति को सहेजना चाहिए। सांग मंचन में बलदेवराज, राजेश कुमार, पवन कुमार, शीशपाल, बलवीर, विक्रम, पालेराम, रमेश कुमार, काला तथा कृष्ण कुमार ने सहयोग दिया। अंत में मैक की ओर से मुख्यअतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया वहीं एनसीजेडसीसी की ओर से सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। इस अवसर पर एनसीजेडसीसी के कार्यक्रम समन्वयक अजय गुप्ता विशेष रुप से उपस्थित रहे।

About postnow

Check Also

श्रीमद्भागवत कथा में सुनाया भक्त धु्रव प्रसंग 

कुरुक्षेत्र, 28 जनवरी। सैक्टर-3 शिव मंदिर में भागवत प्रेमियों द्वारा संगीतमयी श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *