कुरुक्षेत्र, 15 फरवरी। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान एवं आरुण्य के संयुक्त तत्वावधान में शास्त्रीय संगीत संध्या ‘नादरस’ का आयोजन विद्या भारती सभागार में किया गया। देर रात्रि तक चले इस कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्यातिथि संजय भसीन निदेशक, मल्टी आर्ट कल्चरल सैंटर, अम्बाला मंडल एवं विशिष्ट अतिथि प्रेरणा संस्था के संस्थापक एवं समाजसेवी जयभगवान सिंगला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रख्यात तबला गुरु एवं रचनाकार (पंजाब घराना) पं॰ सुशील कुमार जैन को नादरस सम्मान से विभूषित किया गया। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह एवं आरुण्य के सचिव डॉ. सुशील कुमार ने अतिथियों का माल्यार्पण, अंगवस्त्रम तथा श्रीफल से स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि संजय भसीन ने कहा कि नादरस जैसे कार्यक्रम भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि बनारस और काशी का नाम संगीत के लिए अक्सर सुनते हैं लेकिन कुरुक्षेत्र में इस प्रकार की विधाएं निरंतर देखने को मिलती हैं, जिसके लिए विद्या भारती और आरुण्य जैसे संस्थान भी बधाई के पात्र हैं जो शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा दे रहे हैं। कार्यक्रम संयोजक एवं संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कहा कि विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान देश का एक ऐसा शैक्षणिक, सामजिक, सांस्कृतिक संगठन है जो शिक्षा के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन के लिए समर्पित है। इसी उद्धेश्य को लेकर विद्या भारती ने अन्य संस्थाओं से सार्थक सहयोग स्थापित कर शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अनेक आयाम स्थापित किये हैं। उन्होंने कहा कि संगीत की कोई जात-धर्म नहीं होता। उन्होंने ‘अलबेला सजन आयो’, ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा…’, ‘मन तरपत हरि दर्शन को आज’ जैसे गानों का जिक्र करते हुए कहा कि ये गीत अलग-अलग धर्म-मजहब के बड़े-बड़े शास्त्रीय गायक भी गाते हैं। इस अवसर पर पटियाला विश्वविद्यालय के डॉ. अलंकार सिंह का सुमधुर गायन हुआ। पं. गणेश प्रसाद के इस सुयोग्य शिष्य ने राग पूरिया कल्याण में विलंबित तथा द्रुत ख्याल प्रस्तुत कर अपनी दीर्घकालिक शिक्षा का लोहा मनवाया। उन्होंने राग बसन्त से कार्यक्रम का समापन किया। उनके साथ तबले पर डॉ. ज्ञान सागर तथा हारमोनियम पर तरुण जोशी ने संगत की। कार्यक्रम के अंतिम चरण में टापग्रेड कलाकार पं. किशन महाराज के सुयोग्य शिष्य पं. पुंडलिक कृष्ण भागवत का एकल तबला वादन विशेष आकर्षण का केन्द्र था। तबला वादन तथा शास्त्रीय गायन में समान रूप से दक्ष पं. भागवत ने अपनी प्रस्तुति से पूरे सभागार में बनारसी फिजां घोल दी। उन्होंने अपने वादन की शुरुआत बनारस घराने के पारम्परिक अंदाज में पीर-गम्भीर तथा सुन्दर उठान से की। तत्पश्चात उपज अंग से आमद प्रस्तुत कर गुरुओं द्वारा प्राप्त विद्या का आभास कराया और छन्द, कायदा, रेला तथा बनारसी फर्द, गत आदि की सर्वोत्कृष्ट प्रस्तुति द्वारा उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसका श्रोताओं ने अपने स्थान से खड़े होकर तालियों से अभिवादन किया। अंत में पं. सुशील कुमार जैन ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए आयोजकों को बधाई दी। कार्यक्रम में मंच संचालन एवं आभार अभिव्यक्ति डॉ. विवेक जैन की रही। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संगीत विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. शुचिस्मिता शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्षा डॉ. शकुंतला नागर, डॉ. शशि मित्तल, डॉ. आई.सी.मित्तल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. हुकम सिंह, कैप्टन परमजीत सिंह, डॉ. आर.़ऋषि, सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
Post Now India Post Now India