Breaking News
Home / Education / शिक्षा की बढ़ोतरी में शिक्षक का होता है अहम योगदान

शिक्षा की बढ़ोतरी में शिक्षक का होता है अहम योगदान

करनाल 24 दिसम्बर,  करीब दो दशक पहले जब निजी पाठशालाओं का प्रभुत्व न के बराबर था, उस समय से ही हमारे बीच कुछ ऐसे शिक्षक प्रयासरत थे जिनके प्रेरणास्त्रोत और कार्यों ने हमें समाज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए उपयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास हमेशा किया। उन्हीं लोगों में से एक प्रेरणादायक शिक्षक है भगवानदास राणा, जिनका बच्चों के प्रति लगाव और उनको शिक्षित करने का सफर खुद की एक निजी पाठशाला चलाने से हुआ था। काफी प्रयत्नों के बाद उनको राजकीय पाठशाला में पढ़ाने का मौका मिला। शुरू में उन्हें हिंदी विषय पढ़ाने के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालय असंध के गांव में कार्यरत किया गया जहां उनके कार्यों की प्रशंसा के साथ-साथ लोगों का भरपूर सहयोग भी मिला।
भगवानदास राणा ने बताया कि जब वह ददलाना की पाठशाला में शिक्षक के पद पर थे तो उन्होंने खेल के मैदान का सुधार, भवन निर्माण का कार्य करवाना, पाठशाला में बरसाती पानी के प्रबंधन का सिस्टम लगवाना, पीने के पानी की अलग से व्यवस्था करना, सोलर पैनल लगवाना जैस कार्यों को पूरा करवाया और उनके विषय हिंदी में ददलाना की पाठशाला ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और परिणाम आया। इन सभी कार्यो को करने के लिए उन्होंने सरकार के साथ-साथ पाठशाला में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए पंचायत एंव सरपंच, निजी कंपनी और अन्य संस्थाओं का भी समर्थन लिया। उन्हें  इन्हीं कार्यों को ध्यान में रखते हुए उनकी पदोन्नति की गई जिसमें उनको राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय-मुनक (घरौंडा) में प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया।
उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि राजकीय माध्यमिक विद्यालय, खोराखेरी (घरौंडा) में सरपंच द्वारा उन्हें आमंत्रित किया गया। जहां आज प्रधानाध्यापक के पद पर वह लगातार पाठशाला सुधार के कार्यों में जुड़े हुए है। उन्होंने हमेशा सभी व्यक्तियों को जैसे पंचायत, शिक्षा विभाग, अन्य शासकीय विभाग, निजी संस्थाएं और व्यक्ति विशेष को शिक्षा को सुधारने के कार्यो में शामिल किया है। इसी पाठशाला में आने के बाद पाठशाला भवन का पंचायत की मदद से सुधार करवाना, निजी संस्थाओं के सीएसआर परियोजना के तहत पाठशाला विकास के कार्यों को करवाना और अभिभावकों को लगातार पाठशाला में आने के लिए आमंत्रित करना आदि कार्य सफल हुए है। इसी राजकीय पाठशाला के सुधार के लिए शिक्षक साथियों के साथ मिलकर उन्होंने साल 2018 में लगभग 100 बच्चें जो की निजी पाठशालाओं में पड़ते थे उनको राजकीय पाठशाला में प्रवेश दिलाया। इस प्रक्रिया में शामिल था की उप-समूह बनाकर अभिभावकों से मिलना, बच्चों के सीखने के स्तर के बारे में उन्हें बताना, सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी देना और राजकीय पाठशाला से जुडऩे के लिए प्रेरित करना आदि।
भगवानदास राणा हमेशा पाठशाला खुलने के 1 घंटे पहले आया करते है और बच्चों के अकादमिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह हमेशा खुद का निजी समय भी बच्चों को देते है यानी बच्चों को अतिरिक्त समय में हिंदी विषय पढ़ाते है और पढऩे के लिए प्रेरित भी करते है। हर एक बच्चे की जरूरत ध्यान रखकर कर कार्य करने वाले प्रधानाध्यापक अपने शिक्षक साथियों को भी प्रेरित करते है जिसके परिणामरूप अन्य शिक्षक साथियों ने भी हर एक बच्चे की जरूरत को समझते हुए कार्य करना शुरू किया है। इसी राजकीय माध्यमिक विद्यालय, खोराखेड़ी (घरौंडा) में ही उनके एक छात्र जोकि संस्कृत विषय पढ़ाने के लिए नियुक्त किये गए हैं जोकि उनकी अनेक में से एक उपलब्धि है।

About postnow

Check Also

डीसी ने स्वीप गतिविधियों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों को किया सम्मानित

कुरुक्षेत्र  25 जनवरी। उपायुक्त धीरेन्द्र खडगटा ने कहा कि देश की प्रगति के लिए प्रत्येक मतदाता …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *