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शिव आराधना करने वाला व्यक्ति कालसर्प दोष से मुक्त रहता है : कौशिक

कुरुक्षेत्र, 02 मार्च,  यदि जातक की जन्म कुंडली में जब सभी ग्रह राहु व केतु के मध्य पड़ते हैं तो उसे कालसर्प दोष कहते हैं। यह कुंडली का बंधन योग भी कहलाता है। शिवरात्रि के पावन पर्व पर कालसर्प दोष का उपाय करने का विशेष महत्व माना जाता है। जो इस बार शिवरात्रि का महापर्व सोमवार को आ रहा है। कुरुक्षेत्र यज्ञ मंदिर ट्रस्ट दु:खभंजन मार्ग कुरुक्षेत्र के सचिव वैद्य पंडित प्रमोद कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि शिवभक्तों को कालसर्प योग से घबराने की जरूरत नहीं। जो भक्त नित्य प्रति शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, वो जातक कालसर्प दोष से मुक्त रहते हैं। कौशिक जी ने बताया कि शिवरात्रि या नागपंचमी के पावन पर्व पर नाग-नागिन का चांदी का जोड़ा बनवाकर उसके ऊपर सोने का पानी चढ़वाएं। साथ में सवा किलो चने की दाल, सवा मीटर पीला कपड़ा, दो जनेऊ, केसर, पांच प्रकार के फल, पांच प्रकार के मेवे, पंचामृत, गाय का कच्चा दूध, पीले फूल, पीले फूलों की एक माला व 27 बूंदी के लड्डू  शिवलिंग पर चढ़ाने अर्पित करने से कालसर्प दोष दूर हो जाता है। परन्तु सभी व्यक्तियों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कालसर्प योग जैसे बड़े दोषों का ज्योतिष शास्त्र में कोई भी ऐसा उपाय नहीं है जो एक बार करने से जिंदगी भर के लिए अपना पूरा असर रखता हो। इसलिए व्यक्तियों को किसी भी तरह के संदेह में ना पडक़र हर वर्ष नागपंचमी या शिवरात्रि के पावन पर्व पर इस दोष के निवारण हेतु भगवान शिव की शरण में जाना चाहिए। वैद्य पंडित प्रमोद कौशिक ने बताया कि इस उपाय को करने से जातक को मानसिक शांति मिलती है, पितर प्रसन्न होते हैं व धन-धान्य में वृद्धि करते हैं। पारिवारिक क्लेश समाप्त हो जाते हैं, संतान-पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

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