कैथल, 16 जुलाई: श्रम एवं रोजगार विभाग के आर्थिक सलाहकार देवेंद्र सिंह ने कहा कि जल शक्ति अभियान सरकार के साथ-साथ जन प्रतिनिधियों के सहयोग से सफल होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए सामाजिक सरोकार से जुड़े इस अहम मुद्दे में सभी जन प्रतिनिधि अपनी सकारात्मक भागीदारी दें। गांव व शहर में सभी लोगों को इस मुहिम से जोड़ें, ताकि अधिक से अधिक जल का संरक्षण हो सके।
आर्थिक सलाहकार देवेंद्र सिंह जल शक्ति अभियान को लेकर लघु सचिवालय के सभागार में जिला के सरपंचों व नगर पार्षदों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी ग्राम सरपंच अपने-अपने गांव में जल संरक्षण की दिशा में कार्य करें। इस अभियान के तहत सितंबर माह तक विशेष प्लान बनाकर जल संरक्षण की दिशा में कार्य किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए जल का संरक्षण हो सके। ग्राम पंचायतें गांव में व्यर्थ में बहने वाले पानी की रोकथाम के लिए कदम उठाएं। व्यर्थ में बहने वाले पानी से तालाब ओवर फ्लो हो रहे हैं और आसपास के परिवेश में गंदगी फैल रही है। पानी को व्यर्थ बहने देने से हम अपने आपका ही नुकसान कर रहे हैं। सभी का दायित्व बनता है कि व्यर्थ में बहने वाले पानी को रोकें और पानी का इस्तेमाल भी समूचित ढंग से करें। कृषि कार्यों से जुड़े हुए लोग धान की फसल की बजाए मक्का, दलहन आदि की खेती करें, इससे पानी की खपत कम होगी और भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी। ग्राम सभा में लोगों को बुलाकर जल संरक्षण के लिए जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि पंचायती भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए, ताकि अधिक से अधिक बरसात के पानी का संचयन किया जा सके। इसके साथ-साथ सोखता गड्ढे भी बनाए जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में अधिक से अधिक पौधा रोपण किया जाए। सभी जन प्रतिनिधि अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए जल शक्ति अभियान को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य करें। एक बार इस्तेमाल हुए पानी को दूसरे कार्याें में इस्तेमाल करके उसका सद्पयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि कैथल शहर में विद्क्यार झील जल संरक्षण के लिए उपयुक्त स्थान है। इस स्थान पर बरसात के पानी को लाने की व्यवस्था की जाए, ताकि अधिक से अधिक बरसाती पानी इस झील में आ सके। शहर में सूरजकुंड धार्मिक आस्था का प्रतीक है। इसके साथ-साथ इस कुंड में जल का बेहत्तर संरक्षण किया जा सकता है। विभिन्न स्थानों पर लगे सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांट के पानी को खेती के कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नगर पार्षद व सरपंच अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में आम जन से जुड़े होते हैं। इस सामाजिक मुद्दे पर सभी को एक मंच पर लाया जाए, ताकि यह जल शक्ति आंदोलन में प्रत्येक व्यक्ति अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस मौके पर आर्थिक सलाहकार ने जल संरक्षण हेतू जन प्रतिनिधियों से सुझाव भी लिए।
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि जल को बचाना आज के समय की बड़ी महत्वपूर्ण मांग है। हमारे पास सीमित मात्रा में जल उपलब्ध है। जल का अधिक दोहन करने से हमारे सामने विकट परिस्थिति आ सकती है। सभी को अपने आचरण में जल संरक्षण के ध्येय को धारण करना चाहिए। इस महत्वपूर्ण जल आंदोलन को सभी जन प्रतिनिधि एकजुट होकर जन आंदोलन में तबदील करें, ताकि इस धरा पर अधिक से अधिक जल संरक्षण किया जा सके। जो भी ग्राम पंचायतें जल संरक्षण की दिशा में कार्य करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व अन्य क्रिया कलाप करेगी, उन सभी को विशेष रूप से सम्मानित भी किया जाएगा। जितने भी पुराने बोरवैल खराब हो चुके हैं, उन सब की सूची सभी पंचायतें प्रशासन को दें। पुराने बोरवैल को रिचार्ज बोरवैल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। उन सभी जाली लगाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि केवल उसमें बरसात का ही पानी जाए। उन्होंने सभी नगर पार्षदों से भी आह्वान किया कि हर वार्ड में लोगों को व्यर्थ में जल नही गंवाने, इस्तेमाल किए गए रसोईघर के पानी व आरओ के पानी को दोबारा इस्तेमाल करने के बारे में जागरूक करें। प्रत्येक वार्ड में विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक पौधा रोपण भी किया जाए।
इस मौके पर जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजबीर खुंडिया, पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता राकेश गोयल, जिला परिषद के डिप्टी सीईओ सुरेश राविश, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रोजी, कंचन लता, सुरेंद्र कुमार, नगर परिषद की चेयरमैन सीमा कश्यप, सरपंच एसोसिएशन के प्रधान गज्जन सिंह, खारा सिंह सहित अन्य जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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