हरियाणा कला परिषद मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर द्वारा आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृख्ंाला में शनिवार की शाम सूफी गायकी के नाम रही। जिसमें अम्बाला के सुप्रसिद्ध सूफी गायक दीपक गुलजार ने अपनी गायकी का जादू बिखेरा। इस मौके पर मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया। सूफियाना शाम में दीपक गुलजार ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया। इसके बाद अल्ला हू दा अवाजा आवे बुल्ली नी फकीर दी विचों गाकर सभी को आनंदित किया। वहीं इबादत कर इबादत करण दे नाल गल बणदी है, किसे दी अज बणदी ए किसे दी कल बणदी है से दीपक गुलजार ने ईश्वर को याद किया। एक के बाद एक सूफी नगमों का सिलसिला शुरु होते ही सभागार में तालियां गूंजती सुनाई दी। छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाके, पीर मेरया वे जुगनी कैंदी ए ते नाम साईं दा लैंदी ए, नित खैर मंगा सोणिया मैं तेरी दुआ ना कोई होर मंगदी जैसे सूफी तरानों ने श्रोताओं से भरपूर वाहवाही लूटी। एक ओर जहां सूफी गायक दीपक गुलजार अपने गीतों से सभी को मदमस्त कर रहे थे वहीं दूसरी ओर दर्शकदीर्घा में बैठे श्रोता भी तालियों के माध्यम से गुलजार का साथ देते नजर आए। किन्ना सोहणा तैनूं रब ने बनाया के जी करै वेखदां रहां, आजा वे माही तेरा रस्ता उडीक दियां जैसे गीतों को भी दीपक गुलजार ने लोगों की नजर किया। सूफियाना शाम में अंतिम गीत दमादम मस्त कलंदर रहा, जिसपर अधिकतर श्रोता झूमने पर मजबूर हो गए। गुलजार के साथ कीबोर्ड पर आशीष, तबला पर राहुल, गिटार पर पारितोष व हनी सिंह, ढोल पर विक्की व पैड पर मोनू ने साथ दिया। अंत में क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा ने सभी धन्यवाद करते हुए आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा दीपक गुलजार को एक अंगवस्त्र भेंट किया। इस अवसर पर शिवकुमार किरमिच, नरेश सागवाल, मैक के आर्टिस्ट कोर्डिनेटर हरिमोहन कुमार, सीमा काम्बोज, धर्मपाल, प्रसिद्ध वकील एवं प्रमुख समाज सेवी सोमनाथ कक्कड़ आदि भी उपस्थित रहे।
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