हरियाणा की संस्कृति को देखकर गदगद हुए युवा और बुजुर्ग
कुरुक्षेत्र 17 दिसंबर अन्र्तराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 के उपलक्ष्य में पुरूषोत्तमपुरा बाग में जहां विभिन्न कलाकार अपने प्रदेशों की कलाओं को गीतों के माध्यम से जादू बिखेरते हुए लोगों को अपनी ओर आर्कषित कर रहे हैं वहीं हरियाणा की संस्कृति से ओतप्रोत प्रदर्शनी भी किसी से छिपी नहीं है। यहां पर आने वाले पर्यटक जहां इन अद्भूत चीजों को निहारते हुए सैल्फी लेते हुए इस का आनंद ले रहे हैं वहीं युवा, बर्जुग व अन्य पर्यटक कलाकारों के गीतों का भरपूर आनंद ले रहे हैं।
अन्र्तराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर जहां लोग हरियाणा रसोई से सम्बन्धित व्यंजन बाजरे की खिचड़ी, हरियाणवी गोल-गप्पे, हरियाणवी देसी थाली, गुड की चाय, चुरमा, घी कासार आदि व्यंजनों का भरपूर स्वाद चख रहे हैं। विशेष तौर पर हरियाणवी गोल-गप्पों का स्वाद यहां पर भारी भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है। इसके अलावा अन्य व्यंजन भी पर्यटकों को काफी लुभा रहे हैं। यहां पर हुक्का, पीढ़ी भराई, बिजना बुआई, टोकरा बुनाई, दरी बुनाई, खेती-बाड़ी के औजार, पुराने ताले, चित्रकला प्रदर्शनी सहित अन्य स्टाल भी मुख्य आकर्षण का केन्द्र हैं। हरियाणवी रागनी का यहां पर आने वाले बर्जुग आनंद लेते हुए स्वयं भी रागनी गाकर अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं।
मेवात से पीढ़ा भराई का स्टाल लगाने वाले शमशेर ने बताया कि पीढ़़ा हरियाणा की पुरानी परम्परा है। विवाह के उपरांत जब बहू घर पर आती थी तो सबसे पहले उसे पीढ़े पर बिठाया जाता था जोकि शुभ होता था। उन्होंने कहा कि समय बदलने के साथ लोग पीढ़ा परम्परा को न भूले इसलिए वह पीढ़ा भराई का कार्य कर इस परम्परा को जिंदा रखने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को हरियाणवी संस्कृति से रूबरू करवाना व उसे जुड़े रहने के लिए हमें पुरानी परम्परा को सजोए रखना है। इसी प्रकार यहां पर अन्य स्टाल भी लोगों को अपनी आर्किषत कर रहे हैं। मिट्टी के बर्तन, खाट भराई आदि कार्य को भी लोग बड़ी उत्साह से देख रहे हैं। अमीन से आए सरजन सिंह व पातड़ा निवासी बिमला देवी ने बताया कि गीता महोत्सव पर हरियाणवी संस्कृति से लोगों को ओतप्रोत करवा कर पुरानी परम्परा को सजोए रखने की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे महोत्सव से जहां लोगों को विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति, गीतों व उनके रहन-सहन से पता चल रहा है वहीं युवा पीढ़ी को इसका सबसे लाभ होगा।
मॉरीशस एवं गोवा के कलाकारों ने महोत्सव में बिखेरे रंग
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में मॉरीशस के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित लोकनृत्य के माध्यम से महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुत कर भगवान श्रीकृष्ण की जीवनलीला को मंच पर जीवंत स्वरूप प्रदान किया। मॉरीशस के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस नृत्य में चार कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण के विविध स्वरूपों को नृत्य की भाव-भंगिमाओं के माध्यम से बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। इस मौके पर मॉरीशस की टीम प्रभारी ललिता बहरे, जयराज, विगनेश, मनीषा, अधुष्ठिता, रोशनी एवं वशिष्ठ ने बेहतरीन कार्यक्रम प्रस्तुत कर कहा कि मॉरीशस में लघु भारत बसता है। यहां के लोगों द्वारा ही मॉरीशस की उन्नति का रास्ता तय हुआ। भारतीय लोगों के बदौलत ही वहां पर भगवान श्रीकृष्ण व भारतीय संस्कृति से जुड़े हुए लोकनृत्य परम्पराओं एवं मान्यताओं को मॉरीशस की संस्कृति में विशेष स्थान है। इस अवसर गोवा के कलाकारों ने भी वहां के कोंकणी नृत्य के माध्यम से गोवा की संस्कृति की झलक बिखेरी।
हास्य कवियों ने लगवाए हरियाणवी ठहाके
पुरुषोतमपुरा बाग में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें महेन्द्र शर्मा दिल्ली, सत्यदेव हरियाणवी दिल्ली, बीएम बेचैन भिवानी, मास्टर महेन्द्र झज्जर ने अपनी हास्यात्मक कविताओं के माध्यम से खूब ठहाके लगवाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष भारत भूषण भारती ने की। इस अवसर पर महेन्द्र शर्मा ने अपनी कविताओं के माध्यम से दर्शकों से खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने अपनी कविता में कहा कि हरियाणा के सैनिक की पीठ पर कुछ अटका, उसने कहा आदमी है तो हटजा और बम्ब है तो फटजा। इसके अतिरिक्त सत्यदेव हरियाणवी ने अपनी हास्यात्मक कविताओं के माध्यम से पति-पत्नी के रिश्तों की उपमाएं देते हुए कविता सुनाई। मास्टर महेन्द्र शर्मा ने हास्य कवि सम्मेलन में खूब-खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने अपनी घाघरा एवं चि_ी बनाम लव-लेटर के माध्यम से सांस्कृतिक संदेश देते हुए कहा कि मेरी दादी का घाघरा म्हारे घर का पूरा काम चालर्या, घर म्हं बनवाई चार रजाई, दादी के घाघरे ने वे भी सजाई। बीएम बेचैन ने अपने व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के माध्यम से दर्शकों से वाहवाही लूटते हुए पाकिस्तान पर व्यंग्य कसते हुए कविता सुनाकर सबका हंसने पर मजबूर कर दिया।
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