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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रहमसरोवर के पावन तट पर होते भारत के दर्शन

गीता जयंती समारोह को पिछले 3 वर्षो से मिला है अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का दर्जा, एनजेडसीसी कई सालों से कर रही है पर्यटकों का मनोरंजन, हर साल लाखों की संख्या मेें देश विदेश से महोत्सव में पहुंच रहे हैं पर्यटक, विभिन्न राज्यों से जाने-माने शिल्पकार पहुंचते हैं गीता महोत्सव में,
कुरुक्षेत्र 20 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में ब्रहमसरोवर के पावन तट पर भारत की सांस्कृतिक विरासत के सहजता से दर्शन हो जाते हैं। इस महोत्सव में देश-विदेश के कलाकार, शिल्पकार अपनी हस्तकला से महोत्सव की रौनक में चार चांद लगा रहें हैं। इतना ही नहीं यह महोत्सव भारत की प्राचीन परम्परा, संस्कृति और शिल्पकला को सरंक्षण देने का काम भी बखुबी कर रहा हैं। अहम पहलु यह है कि एक छोटे से गीता जयंती समारोह को आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से पिछले 3 सालों से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का दर्जा मिल चुका हैं।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 16 साल पूर्व के दो राज्यों के कलाकार ही उत्तर क्षेत्र सांस्कृति कला केन्द्र पटियाला की तरफ से पहुंचते थे। लेकिन आज 14 राज्यों से आए कलाकार और शिल्पकार महोत्सव में अपनी कला का रंंग जमा रहे हैं। महोत्सव के इस रंग में रंगने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्रशासन के आंकड़ों पर नजर डाले तो अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2016 में करीब 20 लाख पर्यटक व 2017 में करीब 25 लाख पर्यटक पहुंचे थे और इस वर्ष कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा लाखों  पर्यटकों के पहुंचने की सम्भावना व्यक्त की जा रही हैं। इसी आंकड़े को लेकर ही सरकार द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के प्रबंध किए गए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 17राज्यों के शिल्पकार अपने-अपने प्रदेश की शिल्पकला को लेकर पहुंचे हैं। इस शिल्पकला को रोजाना महोत्सव में आने वाले लाखों लोग निहार रहे हैं। इतना ही नहीं यह शिल्पकला हर साल लाखों घरों की शोभा बढ़ाने का काम कर रही हैं। इस शिल्प मेले से जहां लोगों को विभिन्न प्रदेशों की शिल्पकला देखने का सुनहरी अवसर मिलता हैं वहीं इस प्रकार के महोत्सव से शिल्पकला को सरंक्षण देने का कार्य भी सरकार द्वारा किया जा रहा हैं। इस महोत्सव से हजारों शिल्पकारों को आर्थिक रुप से भी फायदा मिलता हैं। इस शिल्पकला के साथ-साथ इस उत्सव के एक मंच पर ही भारत की लोक संस्कृति को देखा जा सकता है। इन लोक नृत्यों में पंजाब के भांगड़ा और गिद्दा ने पर्यटकों के सामने प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी है। इस उत्सव में पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के लोक कलाकारों ने जमकर पर्यटकों का मनोरंजन किया और सभी को अपने मोहपाश में बांध दिया।
सरस व क्राफ्ट मेले के 14वें दिन बुधवार को क्राफ्ट और सरस मेला देखने के लिए लगातार पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। ज्यों-ज्यों महोत्सव आगे बढ़ रहा है, त्यों-त्यों महोत्सव की रौनक भी बढ़ रही है। इस प्रकार ब्रहमसरोवर के घाट भारत की संस्कृति का केंद्र बनता नजर आया। इस मंच पर सभी प्रदेशों की संस्कृति की झलक देखी गई। केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि क्राफ्ट और सरस मेला अभी 23 दिसम्बर 2018 तक जारी रहेगा तथा महोत्सव में दिन-प्रतिदिन बढ़ती भीड़ को देखकर लगता है कि इस बार पर्यटकों का आंकड़ा पिछले वर्ष से ज्यादा होगा।
पर्यटकों को पंसद आए बाजीगरों के करतब
महोत्सव में एनजेडसीसी की तरफ से पर्यटकों का मनोरंजन करने के लिए बाजीगरों के एक ग्रुप को आमंत्रित किया गया। इस ग्रुप के कलाकार घाटों के मुख्य मंच पर आदमी के सिर के ऊपर मटका रखा और मटके के ऊपर आदमी को खड़ा करके जो करतब दिखाए, वे काबिले तारीफ थे। इस करतब पर सभी पर्यटकों ने तालियां बजाई। इसके अतिरिक्त इन कलाकारों ने लोहे ही राड़ को मोडक़र दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।

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