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रंग-बिरंगे फुलों से रंगीन हुई महोत्सव की फिजा

कुरुक्षेत्र 21 दिसम्बर ब्रहमसरोवर के पावन तट पर कागज से बने रंग-बिरंगे गुलाब और अन्य किस्मों के फुल अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की बगियों को महकाने का काम कर रहे है। इस महोत्सव में 4 से 5 स्टाल पर हरियाणा के पानीपत, चंडीगढ़ और वेस्ट बंगाल से पहुंचे शिल्पकार विभिन्न प्रकार के कागज व सोला वुड के फुलों को बनाकर पर्यटकों के लिए लेकर आए है। इन फुलों को बनाकर शिल्पकार कई आवार्ड हासिल कर चुके है। अहम पहलु यह है कि कागजों को फल का रुप देने का काम कई सालों से कर रहे है।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2018 पर शिल्पकार देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए बेहतरीन रंग-बिरंगे सुंदर फुलों को तैयार करके लाएं है। इन फुलों की कीमत भी आम पर्यटकों की पहुंच तक होगी और पिछले 10 सालों से पर्यटकों के लिए यह फुल लेकर आ रहे हैं। शिल्पकार सोयलन मोदी ने विशेष बातचीत करते हुए बताया कि सरकार कागज से बने फुलों की शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई है। शिल्पकारों को मंच मुहैया करवाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव, सुरजकुंड सहित कई अन्य प्रकार के मेलों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इस महोत्सव में गुलाब, सुरजमुखी, कमल, तुलिफ, कलियोंं सहित विभिन्न प्रकार के फुलों की वैरायटी बनाकर लाए हैं। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में इस वर्ष पर्यटकों के लिए सोला वुड के बने हुए विशेष फुल लेकर आए हैं जिनकी कीमत सिर्फ 10 रुपए से लेकर 40 रुपए तक तय की गई हैं। फुलों की शिल्पकला उनका पुश्तैनी कार्य है और सालों से इस शिल्पकला से जुड़े है। उनके दादा और पिता ने भी शिल्पकला को आगे बढ़ाने का काम किया। इस शिल्प कला से कई आवार्ड और इनाम हासिल किए हैं। इस प्रकार के प्रौत्साहनों से कलाकारों के हौंसले बुलंद होते है।

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