कॉस्मिक एस्ट्रो व श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र) के अध्यक्ष ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया होली का त्यौहार इस बार गुरुवार 21 मार्च 2019 को मनाया जाएगा। इससे पहले बुधवार 20 मार्च 2019 को होलिका दहन है। होली की तैयारी हर घर में शुरू हो गई है। घरों के साथ-साथ बाजार भी सजने लगे हैं। होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं और पुराने गिले-शिकवों को दूर करते हैं।
होलिका की पवित्र आग में लोग जौ की बाल और शरीर पर लगाए गए सरसों के उबटन को डालते हैं। ऐसी मान्यता है कि ये करने से घर में खुशी आती है।
होलिका पूजा की सामग्री :
गोबर से बनी होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं, माला, रोली, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, पांच या सात प्रकार के अनाज जैसे नए गेहूं और अन्य फसलों की बालियां, एक लोटा जल, बड़ी-फुलौरी, मीठे पकवान, मिठाइयां और फल ।
डॉ सुरेश मिश्रा के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त :
शुभ मुहूर्त शुरू – रात 08:58 से
शुभ मुहूर्त खत्म – 11:34 तक
होलिका दहन पूजा-विधि :
डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया होलिका दहन से पूर्व होली का पूजन करने का विधान है। इस समय जातक को पूजा करते वक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए। पूजन करने के लिए माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच प्रकार के अनाज में गेंहू की बालियां और साथ में एक लोटा जल रखना चाहिए और उसके बाद होलिका के चारों ओर परिक्रमा करनी चाहिए।
होलिका दहन कभी भी भद्रा काल में नहीं किया जाता। इस बार भद्रा काल का समय 20 मार्च 2019 को सुबह 10 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजे तक रहेगा इसलिए होलिका दहन रात 9 बजे के बाद ही किया जा सकेगा।
होलिका दहन के आध्यात्मिक अर्थ में हम सभी अपनी बुराईयों को योग अग्नि में स्वाहा करें । अपनी आत्मा को सद्गुणों से विकसित कर परमात्म मार्ग पर चले। होली का अर्थ है जो बात आज अच्छी या बुरी हुई उसको भूलने के लिये वर्तमान में जीओं। संकल्प ले कर एक दूसरे की बुराइयों को बन्द करें । सभी के गुणों को देखें क्योंकि परमात्मा हम सभी का रचयिता है तो उसकी रचना सारा विश्व है इसलिए सभी से प्रेम करने का रंग लगाये क्योंकि भगवान ही प्रेम है।
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