करनाल 19 जुलाई, उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने कहा कि हरियाणा के लोगों ने पशुपालन को अपने आय का एक साधन माना है। पशुपालकों ने अपनी कडी मेहनत से दुध उत्पादन में श्वेत क्रांति लाने का काम किया है। सरकार द्वारा भी पशुपालकों को डेरी खोलने तथा देशी गाय पालने के लिए अनुदान राशि दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा देशी नस्ल गायों के महत्व को मध्यनजर रखते हुए गायों की मिनी डेयरी इकाईयां स्थापित करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है जबकि अन्य डेयरी स्कीमों के तहत 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा सरकार ने दूध उत्पादन में वृद्वि करने तथा पशुधन को बढ़ावा देने के लिए अन्य कई योजनाएं लागू की है। हरियाणा सरकार द्वारा डेरी को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बैंकों द्वारा लोगों को लाखों रूपये का कम ब्याज पर ऋण मुहैया करवाया जा रहा है। सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर लोग आत्मनिर्भर हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में दूध की मात्रा मे वृद्धि करने के लिए मुर्राह नस्ल की भैसों के पालन को बढ़ावा दिया गया है। सरकार ने मुर्राह नस्ल के कटडे खरीदने की योजना लागू की है। प्रदेश सरकार द्वारा मुर्राह नस्ल का एक से 15 माह तक का कटडा 5 से 10 हजार रूपये तक खरीदा जाता है। इन कटडों को खरीदकर भिवानी व हिसार स्थित सैन्टरों में भेजा जाता है ताकि इन्हें भैंसा बनाया जा सके। नस्ल सुधार योजना के तहत सरकार तैयार भैंसे को पंचायत की मांग पर मुहैया करवाती है।
उन्होंने बताया कि इन कटडों से नस्लों का फेरबदल करके अच्छी नस्ल की भैंस तैयार होती है जोकि 12 से 20 किलो तक दूध देती है। इस नस्ल के दूध में घी की मात्रा भी अधिक होती र्है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पशुपालन से जोडने के लिए 11 दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के बाद युवा स्वरोजगार चलाने के लिए डेरी खोल सकते हैं।
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