|
कुरुक्षेत्र 30 दिसंबर। श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के द्वारा रूमेटाइड अर्थराइटिस बीमारी के उपचार हेतु एक प्रभावी हर्बल कंपोजिशन को विकसित किया गया है, जोकि टी-बैग के रूप में देने पर रूमेटाइड अर्थराइटिस बीमारी से पीड़ित लोगों के उपचार में सहायक सिद्ध होगा। श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 (डॉ) बलदेव कुमार व डॉ अनिल शर्मा विभागाध्यक्ष द्रव्यगुण विभाग के मार्ग निर्देशन में डॉ रजनी कांत शर्मा शोध वैज्ञानिक ने इस नए हर्बल कंपोजीशन को विकसित किया है। श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 (डॉ) बलदेव कुमार ने बताया, कि भारत में 61 प्रतिशत मौते गैर संक्रामक बिमारियों की वजह से होती है। इसमे हृद्य रोग, कैंसर, डायबीटीज़ भी शामिल है, 2016 मे भारत मे लगभग 58 लाख 17 मौते इन तीन बिमारियो की वजह से हुई है। 2019 में हुए एक शोध के अनुसार लगभग 70 लाख से ज्यादा लोग भारत में रूमेटाइड अर्थराइटिस बीमारी से पीड़ित हैं तथा महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा दो से तीन गुना ज्यादा पाई जाती है। यह बीमारी भारत की लगभग एक प्रतिशत युवाओं को भी प्रभावित कर रही है, और इस बीमारी के कारण घुटनों व शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण बहुत से लोगों को घूमने-फिरने और अपनी दैनिक दिनचर्या में काफी परेशानी महसूस होती है।
भारत सरकार ने भी रूमेटाइड अर्थराइटिस बीमारी को गैर संक्रामक की श्रेणी में डाला है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय उन सभी गैर संक्रामक बीमारियों के निदान हेतु आयुर्वेद मे नए-नए आयुर्वेदिक दवाइयों को विकसित करने के लिए कृतसंकल्प है। श्री कृष्णा विश्वविद्यालय विश्व का पहला विश्वविद्यालय है, जिसमें आयुर्वेद की विभिन्न विद्याओं पर शोध कार्य प्रारंभ हो रहा है, तथा यह विश्वविद्यालय आने वाले समय में प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को विश्व स्तर पर इसके लाभकारी परिणामों को देने में सक्षम होगा। कुलपति प्रो0 (डॉ) बलदेव कुमार ने बताया, कि हमने गहन शोध के आधार पर इस हर्बल कंपोजीशन को बनाया व कई मरीजों पर अपने इस हर्बल कंपोजीशन का प्रयोग किया व पाया कि इस हर्बल कंपोजिशन का प्रयोग करने के बाद मरीजों की दैनिक दिनचर्या के अंदर सुधार होना प्रारंभ हुआ है, प्रारंभिक परिणामों ने हमें उत्साहित किया है, इसीलिए विश्वविद्यालय ने इस हर्बल कंपोजीशन को भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले पेटेंट विभाग में रजिस्टर्ड कराने का निर्णय लिया है, व यह शोध पेटेंट कराने हेतु आवेदन कर दिया गया है, जिसका क्रमंाक नं ज्मउचध्म्.1ध्56850ध्क्मसीपध्
डॉ0 अनिल शर्मा विभागाध्यक्ष द्रव्यगुण विभाग श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय ने कहा कि आयुर्वेद में ऐसी बहुत सी औषधियों का वर्णन है, जिनके द्वारा हम रूमेटाइड अर्थराइटिस को जड़ से खत्म कर सकते हैं। इस हर्बल कंपोजीशन में मात्र तीन से चार ऐसी सर्व सुलभ औषधीय पौधों का प्रयोग किया गया है, जो रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार में सहायक सिद्ध होगे। यह एक ऐसा कारगर आयुर्वेदिक उपचार होगा जिसके माध्यम से इस बीमारी से ग्रसित लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकेगा व लगातार एलोपैथिक दवाइयां खाने के कारण होने वाले दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकेगा।
शोध वैज्ञानिक डॉ रजनी कांत शर्मा ने कहा कि हर्बल कंपोजिशन को एक टीं-बैग के रूप में विकसित किया गया है, तथा यह भारत में यह अपनी तरह का पहला हर्बल टीं-बैग कंपोजीशन होगा जो रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार के लिए प्रयोग किया जाएगा। इस टीं-बैग कंपोजीशन को गर्म पानी में दस मिनट तक रखने पर व उसके बाद उपयोग करने पर यह निश्चित रूप से दर्द में लाभकारी सिद्ध होगा। यह प्राकृतिक रूप से इस बीमारी को जड़ से दूर करने का प्रयास करेगा। डॉ0 रजनी कांत शर्मा व डॉ0 अनिल शर्मा ने इस शोध का श्रेय कुलपति महोद्य प्रो0 (डॉ0) बलदेव कुमार को दिया और कहा उनके सतत् मार्गदर्शन के कारण ही यह शोध कार्य संभव हो सका है।
|
Home / Education / श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय ने बनाया रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार हेतु, भारत का पहला हर्बल टीं-बैग
Check Also
स्वास्थ्य विभाग ने विश्व टीकाकरण सप्ताह तथा एम.आर. (खसरा-रूबेला) उन्मूलन अभियान का किया शुभारंभ
पिपली (कुरुक्षेत्र) (निस) 26 अप्रैल । स्वास्थ्य विभाग हरियाणा द्वारा जिला मे मनाए जा रहे …
Post Now India Post Now India