कुरूक्षेत्र, 13 दिसम्बर। गऊशाला बाजार स्थित श्रीझूलेलाल मंदिर में साप्ताहिक झूलेलाल अमरकथा सुनाई गई। व्यवस्थापक रामलाल ठाकुर ने पिछली कथा से आगे का वर्णन करते हुए कहा कि सिंधु नदी के किनारे जो विशाल मंदिर प्रकट हुआ था, वह भी लालसाईं के साथ गायब हो गया। लालसाईं के आदेशानुसार उसी जगह बादशाह मिरखशाह की मदद से उनके अनुयायियों ने एक मंदिर का निर्माण करवाया और वहां अखंड ज्योति स्वरूप की स्थापना की। यह मंदिर आज भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नगर में कायम है और खड्डे के नाम से जाना जाता है। यहां सभी सम्प्रदायों के लोग जियारत के लिए आते हैें। लालसाईं के उपदेशों का बादशाह मिरखशाह पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा और उसने प्रजा को सताना बंद करके जनकल्याण के कार्य करने शुरू किए। कथा के पश्चात महिला श्रद्धालुओं द्वारा कीर्तन किया गया।
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