करनाल 16 दिसम्बर। मुख्यमंत्री मनोहर लाल अचानक करनाल तहसील कार्यालय में पहुंचे और वहां मौजूद जनता से तहसील कार्यालय की कारगुजारी को लेकर बातचीत की। जनता ने बताया कि सरकार के पारदर्शिता बनाए रखने के आदेशों के बावजूद तहसील कार्यालय में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए टोकन नम्बर से लेकर रजिस्ट्री की डिलीवरी के बारे में जब तहसीलदार से जानकारी मांगी तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बस फिर क्या था, मुख्यमंत्री ने मौके पर ही तहसीलदार रविन्द्र कुमार मलिक, नायब तहसीलदार हवा सिंह पूनिया व रजिस्ट्री क्लर्क राजबीर को निलंबित कर दिया। इतना ही नहीं एक पटवारी द्वारा पिछले 9 दिनों से परेशान किए जाने से संबंधित एक अन्य शिकायत पर भी मुख्यमंत्री ने महिला पटवारी सलमा को भी निलंबित कर दिया। तहसील कार्यालय के औचक निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार भ्रष्ट्राचार पर रोक लगाने के लिए कृत संकल्प है। भ्रष्ट्राचार किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा और भ्रष्ट्र अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसी ही एक शिकायत गुरूग्राम जिला में तहसीलदार के खिलाफ मिली थी, उनके विरूद्ध भी कार्यवाही करते हुए तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि तहसील कार्यालय के अलावा किसी भी अन्य विभाग में इस प्रकार की कोई शिकायत मिलती है तो इसकी सूचना जिला प्रशासन के अलावा भाजपा के जिला अध्यक्ष को भी दें, दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा प्रदेश की बागडोर सम्भालते ही तहसीलदारों की बेगार पर रोक लगा दी गई थी जिसमें कहा गया था कि किसी भी तहसीलदार को वीआईपी के आगमन के समय अपनी जेब से जलपान पर खर्च करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए प्रत्येक जिला उपायुक्त के कार्यालय के लिए 2 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करवाई गई थी, और ये आदेश अब भी जारी हैं।

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