करनाल 8 मई: जिलाधीश करनाल विनय प्रताप सिंह ने लोकसभा चुनाव के दृष्टिïगत जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 127-ए का हवाला देते हुए कहा है कि कोई भी छपाई का काम करने वाला या मुद्रक अपने नाम व पते के बिना चुनाव से जुड़े पम्फलेट या पोस्टर जैसी सामग्री की छपाई नही कर सकेगा। आदेश में कहा गया है कि हालांकि चुनाव में इस तरह की सामग्री चुनाव प्रचार के लिए जनता तक पहुंचाई जाती है, लेकिन अंधाधुंध की गई छपाई से शांतिपूर्ण चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
अत: इसे रोकने के लिए जिलाधीश ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के तहत एक आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि कोई भी मुद्रक प्रचार सामग्री को छापने से पहले अपना डिक्लेरेशन देगा, जिस पर उसे जानने वाले दो व्यक्तियों के नाम भी होने चाहिएं। मुद्रक को उचित समय पर छापी जाने वाली सामग्री की एक प्रति भी डिक्लेरेशन के साथ देनी होगी। आदेश में कहा गया है कि चुनाव के पम्फलेट और पोस्टर या हैंड बिल पर चुनावी सभाओं की तिथि, समय और जगह नहीं लिख सकेंगे, ना ही चुनावी एजेंट या कार्यकर्ताओं के नाम कुछ निर्देश लिखे जाएंगे।
जिलाधीश के अनुसार यदि कोई मुद्रक इन आदेशो की अवहेलना करता हुआ पाया गया, तो उसे गम्भीरता से लिया जाएगा और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी। जिलाधीश के यह आदेश राजकीय मुद्रणालय पर लागू नहीं होंगे। यह आदेश तत्काल लागू होकर चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति तक बने रहेंगे।
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